Freedom Fighters Independence Day 2026

सावन में शिवलिंग पर गलती से भी ना चढ़ाएं ये फूल, भोलेनाथ हो जाएंगे नाराज! भगवान शिव ने दिया था श्राप

सावन में शिवलिंग पर केतकी फूल चढ़ाना वर्जित माना जाता है. जानिए भगवान शिव ने इसे क्यों श्राप दिया और शिव पूजा में बेलपत्र, धतूरा व आक के फूल का महत्व क्या है और किन फूलों से बचें.

Pinterest
Reepu Kumari

नई दिल्ली: सावन में शिवलिंग की पूजा को लेकर भक्त नियमों का पालन करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर केतकी फूल चढ़ाना वर्जित माना जाता है. इसके पीछे शिव पुराण से जुड़ी प्रसिद्ध कथा बताई जाती है. कथा में ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद होता है. भगवान शिव अनंत ज्योतिर्लिंग का रूप धारण करते हैं और दोनों को उसका आदि-अंत खोजने की चुनौती देते हैं. इसी प्रसंग में केतकी फूल का उल्लेख आता है. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करते हैं. हालांकि, हर फूल को शिव पूजा में चढ़ाने की अनुमति धार्मिक मान्यताओं में नहीं बताई गई है. इनमें केतकी का फूल प्रमुख है, जिसे महादेव की पूजा में चढ़ाने से बचने की परंपरा है.

सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और कई तरह की पूजन सामग्री अर्पित करते हैं. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. हालांकि, शिव पूजा में फूल चढ़ाने को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में कुछ नियम बताए गए हैं. इन मान्यताओं में कुछ फूल शुभ माने जाते हैं, जबकि कुछ पुष्पों को शिवलिंग पर चढ़ाने से मना किया जाता है.

केतकी का फूल शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाते?

सावन में शिवलिंग पर केतकी का फूल न चढ़ाने के पीछे शिव पुराण से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा बताई जाती है. कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. इस विवाद को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने एक विशाल और अनंत ज्योतिर्मय स्तंभ प्रकट किया. इसके बाद दोनों देवताओं से कहा गया कि जो इस स्तंभ का आदि या अंत खोज लेगा, उसकी श्रेष्ठता मानी जाएगी. विष्णु नीचे की ओर गए, जबकि ब्रह्मा ऊपर की दिशा में बढ़े.


ब्रह्मा को नहीं मिला शिवलिंग का अंत

कथा के अनुसार, काफी प्रयास करने के बाद भी ब्रह्मा शिवलिंग का अंत नहीं खोज पाए. इसी दौरान उन्हें रास्ते में केतकी का फूल दिखाई दिया. ब्रह्मा ने अपनी बात सही साबित करने के लिए केतकी के फूल को अपनी झूठी गवाही देने के लिए तैयार कर लिया. इसके बाद वह फूल को साथ लेकर भगवान शिव के सामने पहुंचे. ब्रह्मा ने दावा किया कि उन्होंने शिवलिंग का अंत खोज लिया है और केतकी का फूल उनकी बात का प्रमाण है.

झूठ से नाराज हुए भगवान शिव

भगवान शिव ब्रह्मा के झूठ को समझ गए. केतकी के फूल ने भी इस झूठी बात का समर्थन किया. इससे महादेव अत्यंत क्रोधित हुए. धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने ब्रह्मा को दंड दिया और केतकी के फूल को भी श्राप दिया कि उनकी पूजा में इस फूल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. इसी वजह से केतकी फूल शिव पूजा में वर्जित माना जाता है. सावन में विशेष रूप से इस मान्यता का पालन करने वाले भक्त शिवलिंग पर केतकी नहीं चढ़ाते.

शिवलिंग पर कौन से फूल चढ़ाए जाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को कई चीजें प्रिय मानी जाती हैं. पूजा करते समय श्रद्धालु सामान्य तौर पर इन चीजों का इस्तेमाल करते हैं;

  • बेलपत्र
  • धतूरे का फूल
  • आक का फूल
  • जल
  • भांग

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है. माना जाता है कि बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय है और सावन में इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

पूजा में रखें आस्था और परंपरा का ध्यान

सावन में पूजा करते समय धार्मिक मान्यताओं को समझकर उनका पालन करना श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत आस्था का विषय है. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि थोड़ी अलग भी हो सकती है. इसलिए किसी फूल या पूजन सामग्री को लेकर स्थानीय परंपरा और अपने धार्मिक विश्वास को ध्यान में रखना चाहिए. भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता मानी जाती है.

Disclaimer: यह लेख धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं और प्रचलित पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है. इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल धार्मिक, सांस्कृतिक और सामान्य जानकारी प्रदान करना है. इसे ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लिया जाए.