रहमतों का महीना, इबादतों की शाम; आज जुमे पर जानिए आपके शहर में इफ्तार का सटीक समय

रमजान का पाक महीना शुरू हो चुका है और आज जुमे के मौके पर देशभर में मुस्लिम समाज इफ्तार और नमाज की तैयारी में जुटा है. अलग-अलग शहरों में सेहरी और इफ्तार का समय अलग है.

Pinterest
Reepu Kumari

नई दिल्ली: रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही इबादत का माहौल गहरा गया है. कल पहले रोजे के साथ 30 दिन की यह आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई और आज जुमे के दिन दूसरा रोजा रखा जा रहा है. मस्जिदों में नमाज की तैयारियां तेज हैं और घरों में इफ्तार की रौनक दिखने लगी है.

आज 20 फरवरी को जुमे की नमाज अदा की जाएगी, जिसे इस्लाम में खास दर्जा हासिल है. रोजेदार दिनभर सब्र और परहेज के साथ इबादत में लगे रहते हैं और शाम को तय समय पर इफ्तार करते हैं. अलग-अलग शहरों में सेहरी और इफ्तार का समय भिन्न है.

देश के प्रमुख शहरों में इफ्तार का समय

दिल्ली में इफ्तार 06:16 PM पर किया जाएगा. नोएडा में इफ्तार 06:16 PM, लखनऊ में 06:03 PM और जयपुर में 06:23 PM तय है. मुंबई में रोजेदार 06:52 PM पर इफ्तार करेंगे, जबकि पुणे में 06:37 PM पर रोजा खोला जाएगा. कोलकाता में इफ्तार 05:37 PM, पटना में 05:46 PM और रांची में 05:48 PM पर होगा.

दूसरे रोजे की अहमियत

रमजान के शुरुआती दस दिन रहमत के माने जाते हैं. दूसरा रोजा इंसान को आत्म-नियंत्रण और सब्र का संदेश देता है. मौलानाओं के अनुसार रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं पर काबू पाने की साधना है. यह अल्लाह की दया पाने और आत्मशुद्धि का अवसर भी माना जाता है.

जुमे की नमाज का महत्व

इस्लाम में पांच वक्त की नमाज फर्ज है, लेकिन जुमे की नमाज को विशेष महत्व दिया गया है. कहा जाता है कि इस दिन की इबादत हफ्ते भर की गलतियों की माफी का जरिया बनती है. जुमा का अर्थ ही इकट्ठा होना है, इसलिए मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ नमाज अदा करते हैं.

सबसे छोटा और लंबा रोजा

जानकारों के मुताबिक इस बार पहला रोजा करीब 13 घंटे 34 मिनट का रहा. सबसे छोटा रोजा लगभग 12 घंटे 46 मिनट का होगा. 29वें रोजे की सेहरी सुबह 05:02 बजे और इफ्तार शाम 06:31 बजे बताया गया है. वर्ष 2016 में सबसे लंबा रोजा 15 घंटे 45 मिनट का दर्ज हुआ था.

रोजा रखते समय क्या रखें ध्यान

रोजा शुरू करने से पहले सही नीयत और सेहरी जरूरी मानी जाती है, जिससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. गुस्से, झूठ और चुगली से बचते हुए इबादत और दुआ में समय बिताने की सलाह दी जाती है. इफ्तार के समय अल्लाह का शुक्र अदा करना रोजे की रूह माना जाता है.