Premanand Ji Maharaj: शनिदेव को कर्मों का फल देने वाले देवता के रूप में जाना जाता है. शनि देव व्यक्ति को उसके कामों के मुताबिक शुभ और अशुभ फल देते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, नवग्रहों में से शनि ग्रह को सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, शनि को 12 राशियों में घूमने में लगभग 30 साल का समय लग जाता है. इस वजह ये हर राशि में करीब ढाई साल तक रहता है.
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक हर व्यक्ति को जीवन में एक बार शनि की साढ़े साती का सामना करना पड़ता है. शनि के साढ़े साती के तीन चरण होते हैं जो काफी कष्टकारी साबित होते हैं. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब कुंडली में जन्म राशि अर्थात चंद्र राशि से 12वें स्थान पर शनि का गोचर शुरू होता है तो शनि की साढ़े साती शुरू हो जाती हैं. एक राशि में शनि लगभग ढाई साल तक रहते हैं. तीन चरण होने की वजह से कुछ साढ़े सात साल का अंतराल होता है. इस शनि के इस विशेष गोचर को शनि की साढ़े साती के नाम से जाना जाता है.
शनि की साढ़े साती से बचने के लिए लोग कई तरह के उपाय और टोटके करते हैं. कुछ लोग शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करते हैं तो कुछ गले में माला, काला धागा पहनने लग जाते हैं. वहीं, कुछ व्यक्ति कई चीजों का दान करते हैं. वहीं, कुछ लोग लोहे का छल्ला पहनने या दान करते हैं. लेकिन प्रेमानंद महाराज जी का मानना है कि ये टोटके और उपाय करने से शनि की साढ़े साती से बच सकते हैं. उन्होंने इसका आसान हल बताया है.
प्रेमानंद महाराज जी का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह शनि की साढ़े साती से बचने का आसान उपाय बता रहे हैं. उनका कहना है कि जो लोग भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के नाम का जाप करते हैं उनको किसी भी ग्रह से डरने की जरूरत नहीं है. वह आगे कहते हैं कि अगर उंगली में लोहे का छल्ला या कुछ और पहनने लग जाओ गे तो भोजन कैसे करोगे. प्रेमानंद महाराज जी ने कहा बस कृष्ण और राधा- राधा नाम का जाप करते हैं और सभी मुश्किलें दूर हो जाएंगी.
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