हम रोज जनवरी से दिसंबर तक कैलेंडर के महीनों के नाम इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन महीनों के नाम रखे कैसे गए. जनवरी से जून तक कई नाम रोमन देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं, जबकि जुलाई और अगस्त का संबंध रोमन शासकों से है.
वहीं सितंबर से दिसंबर तक के नाम सीधे रोमन गिनती से निकले हैं. आज दुनिया के बड़े हिस्से में इस्तेमाल होने वाला ग्रेगोरियन कैलेंडर प्राचीन रोमन कैलेंडर की परंपरा से विकसित हुआ है. इसकी कहानी करीब 8वीं सदी ईसा पूर्व तक जाती है.
जनवरी का नाम रोमन देवता जेनस यानी Janus के नाम पर पड़ा. जेनस दरवाजों, फाटकों और नई शुरुआत के देवता माने जाते थे. उन्हें आमतौर पर दो चेहरों के साथ दिखाया जाता है, जिसमें एक चेहरा पीछे यानी अतीत की ओर और दूसरा आगे यानी भविष्य की ओर देखता है. लैटिन में इस महीने को Ianuarius कहा जाता था, जो आगे चलकर January बना.
फरवरी का नाम लैटिन शब्द Februa से जुड़ा माना जाता है, जिसका संबंध शुद्धिकरण से था. प्राचीन रोम में इस समय Februa या उससे जुड़े शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाते थे.
March का नाम रोमन युद्ध देवता Mars के नाम पर पड़ा. पुराने रोमन कैलेंडर में मार्च साल का पहला महीना हुआ करता था. सर्दियां खत्म होने के बाद सैन्य अभियान शुरू करने का समय भी इसी दौर से जुड़ा था. इसलिए युद्ध के देवता के नाम वाला महीना साल की शुरुआत में रखा गया.
April के नाम की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों में पूरी सहमति नहीं है. एक प्रमुख मत इसे लैटिन शब्द aperire से जोड़ता है, जिसका अर्थ खोलना है. वसंत के मौसम में फूलों और कलियों के खिलने के कारण यह अर्थ उपयुक्त माना जाता है. एक अन्य व्याख्या इसे देवी Aphrodite से जोड़ती है, जिन्हें रोमन परंपरा में Venus कहा जाता था. हालांकि इस बारे में कोई निश्चित प्रमाण नहीं है.
May का नाम आमतौर पर रोमन देवी Maia से जोड़ा जाता है. उन्हें वृद्धि और उर्वरता से जुड़ी देवी माना जाता था. वसंत के दौरान फसलों और वनस्पतियों की वृद्धि होती थी, इसलिए मई का संबंध इस देवी से जोड़ना स्वाभाविक माना गया. हालांकि कुछ विद्वान इसके नाम को लैटिन शब्द maiores यानी बुजुर्गों से भी जोड़ते हैं.
June का नाम रोमन देवी Juno के नाम पर माना जाता है. वह देवताओं के राजा Jupiter की पत्नी और विवाह तथा परिवार से जुड़ी प्रमुख देवी थीं. इसी वजह से पश्चिमी समाजों में जून को विवाह के लिए शुभ महीना मानने की परंपरा भी विकसित हुई.
July का पुराना नाम Quintilis था, जिसका अर्थ पांचवां महीना था. इसकी वजह यह थी कि पुराने रोमन कैलेंडर में साल मार्च से शुरू होता था और मार्च से गिनने पर यह पांचवां महीना था. बाद में जूलियस सीजर के सम्मान में इस महीने का नाम बदलकर Julius कर दिया गया. सीजर का जन्म भी इसी महीने हुआ था. उन्होंने 45 ईसा पूर्व में जूलियन कैलेंडर लागू किया था, जिसने रोमन कैलेंडर व्यवस्था को काफी बदल दिया.
August का पुराना नाम Sextilis था, जिसका अर्थ छठा महीना था. बाद में करीब 8 ईसा पूर्व में इसका नाम पहले रोमन सम्राट Augustus के सम्मान में बदलकर August रखा गया. एक लोकप्रिय कहानी यह भी है कि जुलाई के बराबर करने के लिए अगस्त में 31 दिन किए गए और फरवरी से एक दिन लिया गया. हालांकि आधुनिक इतिहासकार इस कहानी को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं मानते.
September से December तक के नाम सबसे आसान हैं, क्योंकि इनका संबंध सीधे रोमन संख्याओं से है. September लैटिन Septem से आया, जिसका अर्थ सात है. October, Octo यानी आठ से बना. November, Novem यानी नौ से और December, Decem यानी दस से आया. यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज ये क्रमशः नौवां, दसवां, ग्यारहवां और बारहवां महीना हैं. लेकिन जब रोमन कैलेंडर में मार्च साल का पहला महीना था, तब ये वास्तव में सातवें, आठवें, नौवें और दसवें महीने थे.
बाद में जनवरी और फरवरी को साल में जोड़े जाने और जनवरी को साल की शुरुआत बनाए जाने के बाद महीनों की संख्या आगे खिसक गई, लेकिन पुराने नाम नहीं बदले. यही वजह है कि September में 'सात' और October में 'आठ' का अर्थ आज उनकी स्थिति से मेल नहीं खाता.
जूलियन कैलेंडर में साल की लंबाई वास्तविक सौर वर्ष से थोड़ी अलग थी. लंबे समय में इस छोटे अंतर के कारण तारीखों और मौसमों के बीच अंतर बढ़ने लगा. इसे सुधारने के लिए 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया. इसमें लीप ईयर के नियमों में बदलाव किए गए और कैलेंडर को सौर वर्ष के अधिक करीब लाया गया.
इस सुधार के बाद महीनों के नाम नहीं बदले. जनवरी से दिसंबर तक वही नाम जारी रहे और धीरे-धीरे ग्रेगोरियन कैलेंडर दुनिया के कई हिस्सों में प्रचलित हो गया. ब्रिटेन ने इसे 1752 में अपनाया और भारत में भी ब्रिटिश शासन के दौरान यही कैलेंडर आधिकारिक तौर पर प्रचलित हुआ.