नई दिल्ली: नाग पंचमी को लेकर इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि पर्व 16 अगस्त मनाया जाए या 17 अगस्त. वैदिक पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पंचमी तिथि दो दिनों में पड़ रही है, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम बना हुआ है. हिंदू धर्म में त्योहार का निर्णय सूर्योदय पर विद्यमान तिथि से होता है, इसलिए सही तारीख जानना पूजा और शुभ मुहूर्त के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है और शास्त्र सम्मत भी.
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त शाम 4:52 बजे शुरू होगी और 17 अगस्त शाम 5:00 बजे समाप्त होगी. इसलिए केवल तिथि लगने के आधार पर नहीं, बल्कि सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को महत्व दिया जाता है. चूंकि 17 अगस्त के सूर्योदय पर पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाना शास्त्र सम्मत माना गया है.
17 अगस्त को नाग देवता की पूजा के लिए सबसे शुभ समय प्रातःकाल रहेगा. इस दौरान भगवान शिव और नाग देवता की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.
इस वर्ष नाग पंचमी पर दो अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है.
रवि योग: सुबह 5:51 से 8:04 बजे तक
शुभ योग: प्रातःकाल से अगले दिन 3:29 बजे तक
इन योगों में पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि रवि योग में कई प्रकार के दोषों का प्रभाव कम हो जाता है.
नाग पंचमी के दिन राहुकाल सुबह 7:30 से 9:08 बजे तक रहेगा. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार राहु और केतु से जुड़े दोषों की शांति के लिए इस समय भगवान शिव की उपासना की जाती है. यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर नाग देवता का स्मरण करना शुभ माना जाता है.