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आज होगा मकर संक्रांति का पूजन लेकिन खिचड़ी दान कल, एकादशी ने बदला नियम; जानें सही विधि और शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति 14 जनवरी को पूजा और व्रत के साथ मनाई जाएगी. एकादशी के कारण खिचड़ी और चावल का दान 15 जनवरी को करना शास्त्र सम्मत बताया गया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
आज होगा मकर संक्रांति का पूजन लेकिन खिचड़ी दान कल, एकादशी ने बदला नियम; जानें सही विधि और शुभ मुहूर्त
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष विशेष संयोग के साथ मनाया जा रहा है. 14 जनवरी यानी आज सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसी दिन षटतिला एकादशी का भी संयोग बन रहा है, जिस कारण पूजा और दान के नियमों में बदलाव किया गया है. तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसे ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है.

ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार मकर संक्रांति का पूजन और व्रत 14 जनवरी को करना श्रेष्ठ रहेगा. हालांकि खिचड़ी का दान 15 जनवरी को करना शास्त्र सम्मत बताया गया है. 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल की शुरुआत होगी. यह पुण्यकाल शाम 5:41 बजे तक रहेगा.

कौन-कौन से बन रहे योग?

इस दौरान सूर्य देव का पूजन, तिल और गुड़ का दान तथा भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है. इसी दिन खरमास की समाप्ति भी होगी और इसके साथ ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि के कारण 14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित रहेगा.

ज्योतिष ने क्या बताया?

प्रेरणा ज्योतिष अनुसंधान अध्यक्ष ने बताया कि एकादशी तिथि 14 जनवरी यानी आज को शाम 5:53 बजे समाप्त होगी. इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी. ऐसे में संध्या के बाद अन्य दान तो किए जा सकते हैं, लेकिन खिचड़ी दान के लिए 15 जनवरी की सुबह यानी कल का समय अधिक उचित रहेगा.

एक वर्ष में कितनी संक्रांतियां होती हैं?

ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता ने भी इसी नियम का पालन करने की सलाह दी है. मकर संक्रांति को सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व माना जाता है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य एक माह में एक राशि में गोचर करते हैं. एक वर्ष में सूर्य बारह राशियों का चक्र पूरा करते हैं, जिससे बारह संक्रांतियां होती हैं. इन सभी में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. इसी दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.