Krishna Janmashtami 2026: माखन से लेकर चरण रज तक, कान्हा से जुड़ी इन 4 रहस्यमयी कथा के बारे में जरुर जानें

जन्माष्टमी 2026 पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी चार ऐसी प्रचलित पौराणिक कथाएं चर्चा में हैं, जिनमें उनके जीवन के अनोखे पहलू सामने आते हैं. कहीं माता यशोदा द्वारा कान्हा को लड़की की तरह सजाने की मान्यता है, तो कहीं बंदरों को माखन खिलाने की कथा.

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Reepu Kumari

Krishna Janmashtami 2026: केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनकी लीलाओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं को याद करने का अवसर भी है. श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, कर्तव्य और समर्पण से जुड़ी अनेक कथाओं से भरा है. इनमें कुछ प्रसंग ऐसे भी हैं, जिनके बारे में आमतौर पर कम चर्चा होती है. जन्माष्टमी के मौके पर इन्हीं चार प्रचलित कथाओं को जानना दिलचस्प होगा.

कान्हा को लड़की की तरह क्यों सजाती थीं यशोदा?

प्रचलित कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के जन्म के बाद कंस लगातार उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता रहा. उसने पूतना, बकासुर और दूसरे राक्षसों को भी भेजा. मान्यता है कि अपने कान्हा को ऐसी नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए माता यशोदा कभी कभी उन्हें लड़की के रूप में सजाती थीं, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे और कोई उन्हें आसानी से पहचानकर नुकसान न पहुंचा सके.

माखन चुराने के साथ बंदरों को भी खिलाते थे कान्हा

श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में माखन चोरी का प्रसंग सबसे लोकप्रिय है. कथाओं में उन्हें अपने दोस्तों के साथ माखन बांटकर खाते हुए बताया गया है. लेकिन एक प्रचलित मान्यता यह भी कहती है कि कान्हा बंदरों को भी माखन खिलाया करते थे. इसके पीछे उनके पिछले अवतार भगवान राम से जुड़ी कथा बताई जाती है.


मान्यता है कि श्रीकृष्ण को अपने राम अवतार का स्मरण था. त्रेता युग में भगवान राम को सीता की खोज और रावण के विरुद्ध युद्ध में वानर सेना का सहयोग मिला था. इसी वजह से श्रीकृष्ण का वानरों के प्रति विशेष स्नेह माना जाता है. बंदरों को माखन खिलाने की कथा को प्रेम और कृतज्ञता से जोड़कर देखा जाता है.

गुरु की इच्छा पूरी करने समुद्र की गहराई में पहुंचे

कथा के अनुसार, सांदीपनि का पुत्र समुद्र तट पर गया था और फिर लापता हो गया. श्रीकृष्ण ने समुद्र से उसके बारे में जानकारी ली और समुद्र की गहराइयों तक पहुंचे. वहां उनका सामना एक असुर से हुआ. कुछ पौराणिक संस्करणों में पंचजन और यमलोक का भी उल्लेख मिलता है. अंततः श्रीकृष्ण ने गुरु की इच्छा पूरी की.

राधा रानी ने प्रेम के आगे नहीं सोचा अपना परिणाम

एक प्रचलित कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दौरान हर तरफ उत्सव का माहौल था, लेकिन कान्हा उसमें शामिल नहीं हुए. माता रुक्मिणी ने कारण पूछा तो श्रीकृष्ण ने सिर में तेज दर्द होने की बात कही. कथा में बताया जाता है कि उन्होंने कहा, यदि सच्चा प्रेम करने वाला कोई व्यक्ति अपने पैरों की धूल उनके सिर पर लगा दे, तो दर्द दूर हो सकता है.

चरण रज वाली कथा देती है निस्वार्थ प्रेम का संदेश

प्रचलित कथा के अनुसार, राधा रानी ने धूल से भरा कपड़ा नारद मुनि को दिया और उसे श्रीकृष्ण तक पहुंचाने को कहा. नारद मुनि ने वह कपड़ा श्रीकृष्ण के सिर पर रखा और कथा के अनुसार उनका दर्द दूर हो गया. इसके बाद श्रीकृष्ण ने बताया कि सच्चे प्रेम में अपने लाभ या परिणाम की चिंता नहीं होती.