Hanuman ji Story: सनातन धर्म में भगवान हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और ब्रह्मचर्य का प्रतीक माना जाता है. लाखों लोग उन्हें बाल ब्रह्मचारी के रूप में पूजते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन परम ब्रह्मचारी वानर देव का एक पुत्र भी था? यह बात सुनकर कई लोग हैरान रह जाते हैं. शास्त्रों में इस दिव्य कथा का उल्लेख मिलता है, जो लंका दहन की घटना से जुड़ी है.
जब भगवान राम की सेना लंका पर हमला करने जा रही थी, तब हनुमान जी ने लंका दहन किया. उनकी विशालकाय छलांग और आग बुझाने के दौरान पसीने की एक बूंद समुद्र में गिर गई. समुद्र की एक मछली ने उस बूंद को निगल लिया. इससे मछली के गर्भ में एक दिव्य बालक का विकास हुआ. समय पूरा होने पर उस मछली ने एक शक्तिशाली पुत्र को जन्म दिया. इस बालक का नाम मकरध्वज रखा गया.
मकरध्वज हनुमान जी जैसे ही वानर रूप में थे और उनमें भी अपार शक्ति थी. वे समुद्र तट पर रहते थे और अपनी माता (मछली रूपी) की देखभाल करते थे. जब हनुमान जी लंका से लौट रहे थे, तब पिता-पुत्र की भेंट हुई. हनुमान जी ने उन्हें अपना पुत्र स्वीकार किया. यह कथा बताती है कि ईश्वरीय इच्छा से चमत्कारिक रूप से संतान प्राप्ति हो सकती है, भले ही व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा हो.
हनुमान जी की पत्नी का नाम सुवर्चला है. वे सूर्य देव की पुत्री थीं. शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के नियमों को पूरा करने और विद्या की पूर्णता के लिए हनुमान जी का यह विवाह हुआ. यह विवाह सामान्य गृहस्थ जीवन के लिए नहीं, बल्कि दिव्य उद्देश्य से हुआ था. सुवर्चला जी अत्यंत तेजस्वी और ज्ञानी थीं. इस संबंध से हनुमान जी की ब्रह्मचर्य शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि यह एक आध्यात्मिक संयोग था.
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व होता है. बड़े मंगल (बुढ़वा मंगल) के दिन भक्त विशेष रूप से मकरध्वज और सुवर्चला जी का भी स्मरण करते हैं. इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और मकरध्वज स्तोत्र का जाप करने से शक्ति, संतान सुख और रक्षा प्राप्त होती है.
सरल उपाय
मंगलवार को केले का भोग लगाएं और लाल फूल चढ़ाएं.
'ॐ हनुमते नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें.
मकरध्वज की कथा का श्रवण करें.