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बाईं या दाईं सूंड... कौन से गणेश जी हैं घर के लिए शुभ? गणपति की मूर्ति खरीदने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की मूर्ति लाते समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले वाममुखी गणेश को गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना जाता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
बाईं या दाईं सूंड... कौन से गणेश जी हैं घर के लिए शुभ? गणपति की मूर्ति खरीदने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति बप्पा की स्थापना को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता है. इस दौरान बाजार में अलग-अलग आकार, रंग और मुद्राओं में गणेश जी की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं. हालांकि, घर के लिए मूर्ति खरीदते समय सूंड की दिशा को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वाममुखी और दक्षिणामुखी गणेश जी के स्वरूप और पूजा विधि में अंतर माना जाता है. घर में गणेश जी की स्थापना के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा यानी वाममुखी गणेश को आमतौर पर शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इनका संबंध चंद्र नाड़ी से माना जाता है. इसे शीतलता, सुख, शांति और समृद्धि से जोड़ा जाता है.

वाममुखी गणेश जी की पूजा

वाममुखी गणेश जी की पूजा गृहस्थ परिवार के लिए अपेक्षाकृत सरल मानी जाती है. नियमित पूजा, भोग और आरती के साथ इनकी आराधना की जा सकती है. पूजा में छोटी-मोटी कमी रह जाने पर भी इसे कठोर नियमों से नहीं जोड़ा जाता.

दाईं सूंड वाले गणेश को क्यों माना जाता है विशेष?

दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को दक्षिणामुखी गणेश कहा जाता है. इन्हें सिद्धिविनायक स्वरूप से भी जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में इनका संबंध सूर्य नाड़ी से माना जाता है और इस स्वरूप में अधिक तेज ऊर्जा होने की बात कही जाती है.

दक्षिणामुखी गणेश जी की पूजा में शुद्धता, समय और नियमों का विशेष ध्यान रखने की मान्यता है. इसी कारण इस स्वरूप की प्रतिमा को घर में स्थापित करने के बजाय मंदिरों में अधिक देखा जाता है. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में इनके नियमों को लेकर मत अलग हो सकते हैं.

कैसी होनी चाहिए घर के लिए गणेश जी की मूर्ति?

घर के लिए गणेश जी की प्रतिमा खरीदते समय बैठी हुई मुद्रा को प्राथमिकता दी जा सकती है. धार्मिक मान्यता में बैठे हुए गणेश जी को घर में स्थिरता और सुख-शांति से जोड़ा जाता है. खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा को कई लोग कार्यालय या व्यापारिक स्थानों के लिए उपयुक्त मानते हैं.

प्रतिमा में गणेश जी के हाथ में मोदक या लड्डू और पास में उनका वाहन मूषक होना भी देखा जाता है. मूर्ति खरीदते समय उसे चारों तरफ से अच्छी तरह जांच लेना चाहिए. कहीं से टूटी या चटकी हुई प्रतिमा घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए.

मिट्टी की इको फ्रेंडली मूर्ति चुनें

गणेश चतुर्थी पर प्राकृतिक मिट्टी से बनी इको फ्रेंडली प्रतिमा लेना पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प है. ऐसी प्रतिमाएं विसर्जन के बाद आसानी से मिट्टी में मिल जाती हैं और जल प्रदूषण कम करने में मदद करती हैं.

घर में गणपति की स्थापना करते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा और स्वच्छता है. मूर्ति की दिशा और स्वरूप को लेकर धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकती हैं. इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है.