उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले BJP के सामने चुनौती का नया चेहरा उभरता दिख रहा है. India Today-CVoter के अगस्त Mood of the Nation सर्वे के मुताबिक, अगर आज लोकसभा चुनाव हों तो राज्य की 80 सीटों में INDIA bloc को 41 और BJP-led NDA को 38 सीटें मिल सकती हैं. जनवरी के सर्वे में NDA को 48 और INDIA bloc को 31 सीटों का अनुमान था. हालांकि ये आंकड़े विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं हैं, लेकिन BJP के लिए बदलते राजनीतिक मूड का संकेत जरूर देते हैं.
इसी बदलाव को लेकर चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख ने Gen Z से ज्यादा Gen X पर ध्यान देने की बात कही है. 1965 से 1980 के बीच जन्मी यह पीढ़ी आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाली उम्र में है. देशमुख के मुताबिक, UGC के नए नियमों को लेकर सवर्ण वर्ग में पैदा हुई बेचैनी ने इस पीढ़ी को 1989 के मंडल दौर की याद दिला दी है. नियम फिलहाल रोक दिए गए हैं, लेकिन वापस नहीं लिए गए हैं, जिससे नाराजगी बनी हुई है.
Gen X ने मंडल आयोग के दौर में आरक्षण को लेकर हुए तीखे सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष को करीब से देखा था. अब UGC नियमों को लेकर यह आशंका पैदा हो रही है कि उनके बच्चों पर भी इसका असर पड़ सकता है. यही वजह है कि देशमुख इसे महज युवा असंतोष नहीं, बल्कि BJP के पारंपरिक सवर्ण आधार में पैदा हो रही गहरी बेचैनी के रूप में देखते हैं.
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण और क्षत्रिय समेत सवर्ण समुदाय लंबे समय से BJP के मजबूत समर्थक रहे हैं और उनका हिस्सा 20 फीसदी से ज्यादा माना जाता है. ऐसे में इस वोट बैंक का सिर्फ छोटा हिस्सा भी दूरी बनाता है तो चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं. UGC विवाद को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश में उठती आवाजें BJP के लिए इसी वजह से चिंता बढ़ा रही हैं.
इस नाराजगी के बीच अयोध्या के राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित गबन का विवाद भी BJP के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है. अगस्त MOTN सर्वे में 47 फीसदी लोगों ने माना कि इस विवाद का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकारों पर नकारात्मक पड़ा है.
2024 लोकसभा चुनाव में भी BJP को उत्तर प्रदेश में बड़ा झटका लगा था. पार्टी 80 में से महज 36 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतीं. इससे साफ हुआ कि मजबूत संगठन और हिंदुत्व की राजनीति के बावजूद सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं. अब 2027 से पहले Gen X की नाराजगी, सवर्ण असंतोष और राम मंदिर विवाद अगर एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव में बदलते हैं, तो BJP के लिए उत्तर प्रदेश की लड़ाई पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो सकती है.