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गुड फ्राइडे के बाद ईस्टर संडे कब? जानें हर साल क्यों बदल जाती है ईस्टर की तारीख?

ईसाई मान्यता के अनुसार गुड फ्राइडे के दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था. लेकिन दो दिन बाद रविवार को वे पुनः जीवित हो गए. बाइबल में वर्णित इस चमत्कार की याद में ईस्टर मनाया जाता है. यह पर्व आस्था, उम्मीद, नई शुरुआत और प्रेम का प्रतीक है.

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Edited By: Antima Pal
गुड फ्राइडे के बाद ईस्टर संडे कब? जानें हर साल क्यों बदल जाती है ईस्टर की तारीख?
Courtesy: pinterest

ईसाई समुदाय के लिए ईस्टर संडे बहुत खास पर्व है. यह प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान की खुशी मनाने का दिन है. गुड फ्राइडे के ठीक दो दिन बाद रविवार को ईस्टर संडे मनाया जाता है. 2026 में गुड फ्राइडे 3 अप्रैल (शुक्रवार) को है और ईस्टर संडे 5 अप्रैल (रविवार) को मनाया जाएगा. इन दोनों दिनों के बीच शनिवार को होली वीक का हिस्सा माना जाता है. 

गुड फ्राइडे के बाद ईस्टर संडे कब? 

ईसाई मान्यता के अनुसार गुड फ्राइडे के दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था. लेकिन दो दिन बाद रविवार को वे पुनः जीवित हो गए. बाइबल में वर्णित इस चमत्कार की याद में ईस्टर मनाया जाता है. यह पर्व आस्था, उम्मीद, नई शुरुआत और प्रेम का प्रतीक है. यीशु के पुनरुत्थान के बाद वे 40 दिनों तक पृथ्वी पर रहे और अपने शिष्यों को प्रेम, दया, क्षमा तथा मानवता का संदेश दिया. फिर वे स्वर्ग चले गए. ईस्टर से जुड़े इस पूरे सप्ताह को होली वीक कहते हैं, जिसमें शोक, प्रार्थना और अंत में खुशी का मेल होता है. 

हर साल ईस्टर की तारीख क्यों बदलती है?

ईस्टर एक फिक्स्ड डेट का त्योहार नहीं है, इसे मूवेबल फेस्ट कहा जाता है. इसकी तारीख हर साल बदलती है क्योंकि यह सूर्य और चंद्रमा दोनों पर आधारित है. ईस्टर हमेशा वसंत ऋतु के पहले पूर्णिमा के बाद आने वाले पहले रविवार को मनाया जाता है. वसंत ऋतु की शुरुआत को स्प्रिंग इक्विनॉक्स माना जाता है, जो आमतौर पर 20 या 21 मार्च को होता है. इसके बाद पहली पूर्णिमा आने पर अगला रविवार ईस्टर होता है. 

चंद्रमा का चक्र सौर कैलेंडर से मैच नहीं करता, इसलिए तारीख हर साल अलग-अलग हो जाती है. ईस्टर की तारीख मार्च 22 से अप्रैल 25 के बीच कभी भी पड़ सकती है. ईस्टर पर लोग चर्च जाते हैं, प्रार्थना करते हैं, अंडे रंगते हैं (जो नई जिंदगी का प्रतीक है), चॉकलेट और गिफ्ट्स बांटते हैं. बच्चे ईस्टर बनी की कहानी का मजा लेते हैं। यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आशा और नवीनीकरण का संदेश देता है.