तिलक लगाने में न करें ये गलती, जानें किस उंगली का इस्तेमाल माना जाता है शुभ

हिंदू धर्म में तिलक को आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, खुद को तिलक लगाने के लिए अनामिका उंगली और दूसरे व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए अंगूठे के इस्तेमाल की मान्यता है.

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हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान माथे पर तिलक लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं में तिलक को भगवान के प्रति आस्था, समर्पण और शुभता का प्रतीक माना जाता है. मंदिर दर्शन, पूजा और कई मांगलिक कार्यों के दौरान भी तिलक लगाया जाता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, तिलक लगाने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं.

मान्यता के अनुसार, तिलक लगाने से पहले स्नान करके शरीर को साफ रखना चाहिए. पूजा के दौरान सबसे पहले अपने इष्ट देव को तिलक लगाने की परंपरा बताई गई है. इसके बाद व्यक्ति स्वयं तिलक धारण कर सकता है. अपने माथे पर तिलक लगाने के लिए आमतौर पर अनामिका यानी रिंग फिंगर का इस्तेमाल शुभ माना जाता है. वहीं, किसी दूसरे व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए अंगूठे का इस्तेमाल करने की मान्यता है.

क्या है धार्मिक मान्यता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिलक लगाने के बाद अपने आचरण और व्यवहार का भी ध्यान रखना चाहिए. साथ ही तिलक लगाकर सोने से बचने की सलाह दी जाती है.


अलग-अलग तिलक का क्या महत्व है?

हिंदू परंपरा में तिलक के लिए अलग-अलग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, सफेद चंदन का तिलक मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने से जुड़ा माना जाता है. रोली और कुमकुम का तिलक आकर्षण से संबंधित माना जाता है. वहीं, केसर का तिलक नाम और यश से जुड़ा शुभ माना जाता है.

गोरोचन के तिलक को कार्यों में सफलता से जोड़कर देखा जाता है. अष्टगंध का तिलक विद्या और बुद्धि के लिए शुभ माना जाता है, इसलिए विद्यार्थियों के लिए इसे खास बताया जाता है. वहीं, भस्म का तिलक भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में इसे संकटों से बचाव से भी जोड़ा गया है.

ग्रहों के अनुसार कौन सा तिलक शुभ माना जाता है?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग ग्रहों को मजबूत करने के लिए अलग प्रकार के तिलक का प्रयोग किया जाता है. सूर्य के लिए अनामिका उंगली से लाल चंदन का तिलक लगाने की मान्यता है. चंद्रमा के लिए सफेद चंदन और मंगल के लिए नारंगी सिंदूर का तिलक शुभ माना जाता है.

बुध ग्रह के लिए अष्टगंध और बृहस्पति के लिए केसर का तिलक लगाने की मान्यता है. शुक्र के लिए पहले रोली और उसके ऊपर अक्षत लगाने की परंपरा बताई जाती है. वहीं, शनि, राहु और केतु के लिए माथे पर तीन उंगलियों से भस्म लगाने की मान्यता है. इसे त्रिपुंड कहा जाता है.

महिलाओं की काली बिंदी को लेकर क्या मान्यता है?

महिलाओं की काली बिंदी को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. कुछ परंपराओं में काले रंग को दुख और शोक से जोड़ा जाता है. इसी वजह से कुछ मान्यताओं के अनुसार विवाहित महिलाओं को काली बिंदी या काला तिलक लगाने से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि, यह धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का विषय है और अलग-अलग परिवारों तथा परंपराओं में इसके नियम अलग हो सकते हैं.

कुल मिलाकर, तिलक केवल माथे पर लगाया जाने वाला धार्मिक चिह्न नहीं माना जाता, बल्कि हिंदू परंपरा में इसे आस्था और शुभता से जोड़कर देखा जाता है. तिलक लगाने के नियम और उसके महत्व को लेकर अलग-अलग संप्रदायों और परंपराओं में भिन्न मान्यताएं भी मिलती हैं.