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बसंत पंचमी पर एक बार कर के देखें ये उपाय, बच्चों का दिमाग बनेगा कंप्यूटर! हर साल टॉप करेगा आपका बच्चा!

बसंत पंचमी का दिन देवी सरस्वती की पूजा और विद्यारंभ संस्कार के लिए सबसे शुभ माना जाता है. इस दिन छोटे बच्चों का विद्यारंभ कराने से उनकी बुद्धि तेज होती है पढ़ाई में मन लगता है और जीवन में शिक्षा से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं.

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Edited By: Babli Rautela
बसंत पंचमी पर एक बार कर के देखें ये उपाय, बच्चों का दिमाग बनेगा कंप्यूटर! हर साल टॉप करेगा आपका बच्चा!
Courtesy: FreePik

बसंत पंचमी का दिन विद्या और बुद्धि की देवी सरस्वती को समर्पित होता है. इस दिन ज्ञान आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. हिंदू धर्म में मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन किया गया हर शुभ कार्य सफल होता है. इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. इसका अर्थ है कि इस दिन किसी विशेष समय की गणना किए बिना शुभ कार्य किए जा सकते हैं. यही कारण है कि विद्यारंभ संस्कार के लिए यह दिन सबसे श्रेष्ठ माना गया है.

विद्यारंभ संस्कार हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है. इस संस्कार के माध्यम से बच्चे की औपचारिक शिक्षा की शुरुआत कराई जाती है. शास्त्रों के अनुसार जब बच्चे को सही समय पर विद्यारंभ कराया जाता है तो उसकी सीखने की क्षमता बढ़ती है. बच्चे के मन में ज्ञान के प्रति सम्मान और रुचि विकसित होती है. यह संस्कार यह सिखाता है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली साधना है.

बसंत पंचमी पर विद्यारंभ क्यों माना गया है श्रेष्ठ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन विद्यारंभ कराने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस दिन किया गया विद्यारंभ बच्चे की बुद्धि को तेज करता है और उसकी स्मरण शक्ति मजबूत होती है. कहा जाता है कि इस दिन पढ़ाई शुरू करने वाले बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में कम बाधाओं का सामना करना पड़ता है. 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी है और यह दिन विद्यारंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है.

विद्यारंभ संस्कार करने से लाभ

विद्यारंभ संस्कार करने से बच्चे का दिमाग तेज होता है. पढ़ाई में उसका मन लगने लगता है. एकाग्रता बढ़ती है और समझने की शक्ति विकसित होती है. ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास अधिक देखा जाता है. वे न केवल पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करते हैं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार विद्यारंभ कराने से शिक्षा में रुकावट नहीं आती और सफलता के मार्ग खुलते हैं.

विद्यारंभ संस्कार के दिन बच्चे को सुबह नहलाकर साफ सुथरे और पीले रंग के कपड़े पहनाएं. इसके बाद देवी सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा की तैयारी करें. दीपक जलाएं और देवी को फूल फल और मिठाई अर्पित करें. पूजा के दौरान सरस्वती मंत्र का जाप करें. इसके बाद बच्चे की स्लेट किताब और कलम की भी पूजा करें. बच्चे की उंगली पकड़कर केसर की स्याही से या साफ चावलों पर ओम या श्री लिखवाएं. यदि बच्चा स्लेट पर लिखने योग्य है तो स्लेट पर भी यही लिखवाया जा सकता है. यह क्रिया बच्चे के जीवन में शिक्षा की शुभ शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है.

विद्यारंभ के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

विद्यारंभ संस्कार के समय वातावरण शांत और पवित्र होना चाहिए. बच्चे पर किसी प्रकार का दबाव न डालें. संस्कार को प्रेम और सकारात्मक भावना के साथ करें. पूजा के बाद देवी सरस्वती की आरती करें और बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना करें. माता पिता को चाहिए कि वे स्वयं भी शिक्षा के महत्व को समझें और बच्चे के सामने इसका आदर्श प्रस्तुत करें.

आज के समय में पढ़ाई का दबाव बहुत अधिक है. ऐसे में विद्यारंभ संस्कार बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है. यह संस्कार बच्चे को यह सिखाता है कि ज्ञान ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है. धार्मिक मान्यताओं के साथ साथ मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी यह संस्कार बच्चे में सकारात्मक सोच विकसित करता है.