'यह जीत हिंदुत्व के सहारे ही संभव', बंगाल में बीजेपी की जीत से बांग्लादेश में हलचल
पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की जीत ने बांग्लादेशी मीडिया का ध्यान खींचा है. वहां के अखबारों ने जीत, चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची विवाद और अल्पसंख्यक मुद्दों पर सवाल उठाए हैं.
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड जनादेश मिला है. 293 सीटों में से बीजेपी ने 200 से अधिक सीटें अपने नामा कर ली है, जो बहुमत के आंकड़े 148 से काफी अधिक है. इस संभावित जीत को लेकर पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी व्यापक चर्चा हो रही है. वहां के प्रमुख अखबार चुनावी घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपने विश्लेषण में लिखा है कि यह चुनाव सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय गणतंत्र के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है. लेख में दो अहम पहलुओं का जिक्र किया गया है, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटना और हिंसा रोकने के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती.
बीजेपी की जीत और राजनीतिक असर
विश्लेषण में कहा गया है कि यदि बीजेपी सत्ता में आती है तो यह उसके लिए बड़ा राजनीतिक मील का पत्थर होगा, खासकर उन राज्यों में जहां अब तक जीत मुश्किल रही है. लेख के मुताबिक, यह जीत हिंदुत्व आधारित ध्रुवीकरण के सहारे संभव हो सकती है. साथ ही, इससे राज्य में औद्योगिकीकरण और केंद्र से फंडिंग बढ़ने की संभावना भी जताई गई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है.
चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट पर सवाल
द डेली स्टार में प्रकाशित लेख में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए. हालांकि कई मामलों में नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतें सामने आईं, जिससे मतदाताओं में नाराजगी देखी गई.
बांग्लादेशी मीडिया ने बीजेपी के चुनाव प्रचार में मुस्लिम मुद्दे के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बड़ी संख्या में कथित बांग्लादेशी मुसलमानों और रोहिंग्या की मौजूदगी के दावों के बावजूद चुनाव आयोग एक भी घुसपैठिए की पहचान नहीं कर पाया.
तृणमूल कांग्रेस की चुनौतियां
रिपोर्ट्स में तृणमूल कांग्रेस की कमजोरियों का भी जिक्र है. पार्टी पर भ्रष्टाचार और वसूली जैसे आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि हार की स्थिति में उसके संगठनात्मक ढांचे पर असर पड़ सकता है. दैनिक इत्तेफाक ने तो बीजेपी की जीत पर लिखा है कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत होगी.