केरल में 10 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस, वामपंथ का सूपड़ा साफ; 140 सीटों के नतीजे घोषित
केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की है. इसी के साथ सत्ता से वामपंथी गठबंधन एलडीएफ की विदाई हो गई है.
केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. केरल विधानसभा चुनाव की सभी 140 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इन चुनावों में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 63 सीटों पर अपना कब्जा जमाया. वह राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इसके साथ ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है.
एलडीएफ को मिली करारी हार
केरल के चुनावी इतिहास में यह नतीजा वामपंथी दलों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है. पिछले दो कार्यकालों से लगातार राज्य की सत्ता पर राज करने वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) को इस बार मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया है. चुनाव में मुख्य मुकाबला यूडीएफ और एलडीएफ के बीच ही था. इसमें एलडीएफ को भारी हार झेलनी पड़ी. सीपीएम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा और वह केवल 26 सीटों पर सिमट गई है. वहीं सीपीआई को भी मात्र 8 सीटों से संतोष करना पड़ा है.
अन्य दलों का चुनावी प्रदर्शन
कांग्रेस और सीपीएम के अलावा केरल चुनाव में उतरे अन्य राजनीतिक दलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने बेहतरीन खेल दिखाया है. मुस्लिम लीग ने कुल 22 विधानसभा सीटों पर अपनी शानदार जीत दर्ज की है. इसके अलावा क्षेत्रीय दल केरल कांग्रेस के खाते में 7 सीटें गई हैं. वहीं रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने 3 सीटों पर सफलता प्राप्त की है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी भी केरल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब रही है और उसने 3 सीटों पर अपना परचम लहराया है.
दशकों बाद देश में वामपंथ हुआ सत्ता से बाहर
केरल विधानसभा चुनाव के यह नतीजे भारतीय राजनीति के पटल पर एक बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं. वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की इस हार के साथ भारत में वामपंथी राजनीति का एक युग समाप्त होता दिख रहा है. 1960 के दशक के बाद देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार ऐसा मौका आया है, जब भारत के किसी भी राज्य में वामपंथी दलों की सरकार सत्ता में नहीं होगी. केरल उनका अंतिम मजबूत गढ़ माना जाता था. अब वहां भी उनका प्रभाव पूरी तरह से खत्म हो गया है.
लोगों में दिखा जज्बा
केरल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुल 883 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे. राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों के लिए भारी संख्या में जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. केरल में सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को 71 सीटों के जादुई आंकड़े की जरूरत होती है. कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इस आंकड़े को पार कर भारी अंतर से जीत दर्ज की है और राज्य में एक नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है.