कोलकाता: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है और उन पर बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है.
हाल ही में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, हिमंत सरमा ने साफ तौर पर कहा कि उनका इरादा हर एक बांग्लादेशी मुसलमान को बाहर निकालने का है. उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें लात मारकर भगाने वाले हैं, किसी का डर नहीं है.
'Mamata Banerjee Ne Khool Ke Rakha Hai... Border'
— Manish Pangotra🇮🇳 (@ManishPangotra5) April 19, 2026
"I keep kicking Kangladeshi Muslims out from Assam.....
If we want to see all Bangladeshi Muslims out of India, we have to vote for NDA"
- Assam CM Himanta Da pic.twitter.com/7yc2BZX4cP
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने बांग्लादेश के साथ बंगाल की सीमाएं पूरी तरह से खुली छोड़ रखी हैं. 'हर दिन बांग्लादेशी मुसलमान बंगाल की सीमा पार करते हैं. मैं उन्हें असम से बाहर निकाल देता हूं, लेकिन वे फिर वापस आ जाते हैं. इसलिए अगर भारत को बांग्लादेशी मुसलमानों से आजाद कराना है, तो पश्चिम बंगाल में भी BJP सरकार का होना जरूरी है.'
सरमा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से, बनर्जी ने पूरे बंगाल राज्य को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा, 'हमें ममता बनर्जी को बंगाल के मुख्यमंत्री पद से हटाना होगा. नहीं तो एक दिन बांग्लादेशी मुसलमान यह राज्य हमसे छीन लेंगे.'
BJP नेता ने दावा किया कि बनर्जी के कार्यकाल के दौरान उत्तरी बंगाल में कोई विकास नहीं हुआ है. उन्होंने आगे कहा, 'जिस पल बंगाल में BJP सरकार बनेगी, हम इस क्षेत्र से सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाल देंगे.' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सत्ता में आने पर, BJP गोरखालैंड मुद्दे का संवैधानिक हल निकालेगी और गोरखाओं को न्याय दिलाएगी.
इस बीच शनिवार को तृणमूल कांग्रेस ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया, '16 अप्रैल को कूच बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, सरमा ने भड़काऊ, ध्रुवीकरण करने वाले और आपराधिक रूप से डराने वाले बयान दिए, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मानहानिकारक भी थे.'
इसमें आगे आरोप लगाया गया कि ऐसे बयान पश्चिम बंगाल में विभिन्न समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं, जिससे शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया बाधित हो सकती है.