नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़ा भूचाल आ गया है. महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने भाजपा से इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया है. इस बड़े उलटफेर ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है. जहां भाजपा के लिए यह एक करारा झटका है, वहीं ममता बनर्जी के लिए यह बड़ी रणनीतिक बढ़त है. चंद्र कुमार बोस अब टीएमसी के साथ बंगाल की सेवा करेंगे.
पार्टी छोड़ने के बाद चंद्र कुमार बोस ने अपने रुख को लेकर बेहद सख्त तेवर दिखाए. उन्होंने भाजपा में अपने कार्यकाल को एक 'ऐतिहासिक गलती' करार दिया और कहा कि उन्हें अपनी इस चूक का एहसास जल्दी ही हो गया था. बोस का मानना है कि जो पार्टी केवल चुनाव जीतने के लिए ध्रुवीकरण और विभाजन का सहारा लेती है, वह समाज के लिए सही नहीं है. उन्होंने सांप्रदायिकता को एकजुट होकर हराने और राष्ट्र की एकता की रक्षा करने पर विशेष जोर दिया.
चंद्र कुमार बोस ने केवल दल ही नहीं बदला, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) की कड़ी आलोचना करते हुए दावा किया कि राज्य के लगभग 90 लाख लोगों ने अपना वोट देने का अधिकार खो दिया है. बोस के अनुसार, इन लाखों लोगों में कई वास्तविक मतदाता शामिल हैं जिन्हें साजिश के तहत हटाया गया है. उन्होंने नागरिक समाज और जागरूक लोगों से इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की.
बोस ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने पूरी 'एसआईआर' प्रक्रिया को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार देते हुए आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है. उन्होंने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में आयोग को 'निकम्मा' तक कह दिया. बोस का कहना है कि आयोग चुनाव प्रचार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहा है और वह केवल अपने आकाओं के इशारों पर काम कर रहा है.
बंगाल के स्वाभिमान और क्रांतिकारी इतिहास का हवाला देते हुए चंद्र कुमार बोस ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रगतिशील लोगों को जगाने की कोशिश की. उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संदेश 'उठो, जागो' का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल के लोग इस तरह के अपमान को कभी सहन नहीं करेंगे. उनका मानना है कि अब समय आ गया है जब सभी समुदायों को एकजुट होकर उन ताकतों का मुकाबला करना चाहिए जो मतदाताओं के बीच नफरत की दीवार खड़ी करने का काम कर रही हैं.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जंग दो चरणों में होने वाली है, जहां 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे. साल 2021 के चुनावों में तृणमूल ने 213 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी. इस बार चंद्र कुमार बोस जैसे बड़े चेहरे के टीएमसी में आने से चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस राजनीतिक बदलाव पर अपनी क्या मुहर लगाती है.