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मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, संपत्ति खुलासे पर TVK के विजय को नोटिस

मद्रास हाई कोर्ट ने अभिनेता विजय के चुनावी हलफनामों में 100 करोड़ से अधिक की कथित गड़बड़ी पर नोटिस जारी किया है. अदालत ने एक सप्ताह में जवाब मांगा और मामले में कई एजेंसियों को शामिल किया.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले अभिनेता और TVK नेता विजय को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है. मद्रास हाई कोर्ट ने उनके चुनावी हलफनामों में संपत्ति के खुलासे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. अदालत ने पहली नजर में 100 करोड़ रूपये से ज्यादा की कथित गड़बड़ी पर चिंता जताई है. यह मामला ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी माहौल चरम पर है और हर राजनीतिक गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है.

मद्रास हाई कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि हलफनामों में एक बड़ी अनियमितता दिखाई दे रही है. अदालत के अनुसार, एक निर्वाचन क्षेत्र में ₹100 करोड़ से अधिक की संपत्ति का खुलासा नहीं किया गया है. यह टिप्पणी मामले की गंभीरता को दर्शाती है और इससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.

दो हलफनामों में बड़ा अंतर

याचिका के अनुसार, विजय ने पेरंबूर सीट के लिए ₹115.13 करोड़ की संपत्ति घोषित की, जबकि तिरुचि ईस्ट सीट के लिए ₹220.15 करोड़ की संपत्ति बताई. दोनों आंकड़ों में ₹100 करोड़ से ज्यादा का अंतर है. याचिकाकर्ता का दावा है कि यह अंतर किसी सामान्य गलती से संभव नहीं है और इसके पीछे ठोस कारण होना चाहिए.


याचिकाकर्ता के आरोप

चेन्नई निवासी वी. विग्नेश ने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ गलती नहीं बल्कि संपत्ति छिपाने का संकेत हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस अंतर से फंड के स्रोत और स्वामित्व को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं. उनके वकील ने अदालत में कहा कि इतनी बड़ी विसंगति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

एजेंसियों को नोटिस

अदालत ने इस मामले में सिर्फ विजय ही नहीं, बल्कि आयकर विभाग, चुनाव आयोग और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है. सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. इससे साफ है कि अदालत इस मामले की गहराई से जांच चाहती है.

चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती

23 अप्रैल को तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर मतदान होना है. ऐसे में यह विवाद विजय के चुनावी अभियान को प्रभावित कर सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बन सकता है और विपक्ष इसे जोर-शोर से उठाएगा.