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India Daily

तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK में आई दरार! PM मोदी कर रहे ताबड़तोड़ प्रचार, वहीं राहुल गांधी की दूरी से बढ़ी सियासी गर्मी; उठे बड़े सवाल

तमिलनाडु चुनाव में पीएम मोदी के सक्रिय प्रचार और राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस-DMK गठबंधन में दरार की अटकलें तेज हो गई हैं. पुडुचेरी में दोनों नेताओं के अलग-अलग कार्यक्रम ने इन चर्चाओं को और बढ़ाया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK में आई दरार! PM मोदी कर रहे ताबड़तोड़ प्रचार, वहीं राहुल गांधी की दूरी से बढ़ी सियासी गर्मी; उठे बड़े सवाल
Courtesy: @ani_digital x account

चेन्नई: तमिलनाडु में चुनाव से जुड़ी गतिविधियां ज़ोरों पर हैं. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  BJP और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के लिए माहौल बनाने के लिए लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं, वहीं तमिलनाडु में प्रचार अभियान से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गैरमौजूदगी राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रही है.

पिछले दो महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BJP और उसके सहयोगियों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया है. उनका प्रचार अभियान यहीं नहीं रुक रहा है. PM मोदी 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा करने वाले हैं, जहां वे नागरकोइल में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और NDA उम्मीदवारों के समर्थन में वोट मांगेंगे.

क्यों उठ रहे DMK के साथ रिश्तों पर सवाल?

PM मोदी के जोरदार प्रचार अभियान के बिल्कुल विपरीत कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में एक बार भी प्रचार नहीं किया है. उनकी गैरमौजूदगी ने इस अटकल को हवा दी है कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी DMK के बीच गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है.

पुडुचेरी में क्या मिले संकेत?

रिपोर्ट के अनुसार दोनों पार्टियों के बीच तनाव का सबसे स्पष्ट संकेत सोमवार को पुडुचेरी में देखने को मिला. राहुल गांधी चुनाव प्रचार के अंतिम चरण के दौरान पुडुचेरी पहुंचे. उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए स्थानीय लोगों से समर्थन मांगा लेकिन अपने पूरे भाषण के दौरान उन्होंने एक बार भी अपने सहयोगी DMK या उसके अध्यक्ष M.K. स्टालिन का नाम नहीं लिया.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि M.K. स्टालिन भी उसी दिन पुडुचेरी में मौजूद थे. फिर भी दोनों शीर्ष नेताओं के चुनावी प्रचार का कार्यक्रम इस तरह से बनाया गया था कि उनके बीच आमने-सामने की मुलाकात पूरी तरह से टल गई. जहां राहुल गांधी ने सुबह के समय अपना प्रचार किया, वहीं स्टालिन शाम को उस इलाके में पहुंचे.

क्या हो सकती है इसकी वजह?

इस बात की पुष्टि करते हुए DMK के एक पदाधिकारी ने कहा, 'राहुल ने अपने भाषण के दौरान स्टालिन का नाम एक बार भी नहीं लिया.' बदले में स्टालिन ने भी राहुल गांधी का कोई जिक्र नहीं किया. 

DMK के संगठन सचिव ने क्या बताया?

गठबंधन के भीतर मनमुटाव की इन खबरों के बीच DMK के संगठन सचिव R.S. भारती ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपनी-अपनी जनसभाओं की योजनाएं काफी पहले ही तय कर ली थीं और आखिरी समय में संयुक्त रैली के लिए अपने कार्यक्रम में बदलाव करना मुमकिन नहीं था. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करते हुए दिखाई देंगे.