नई दिल्लीः तमिलनाडु में कल मतों की गिनती होगी. असेंबली इलेक्शन में तमिलनाडु की पांच हाई प्रोफाइल सीटों पर सबकी नजर लगी हुई है. इस चुनाव में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से लेकर विजय तक, तमाम बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. खासकर सूबे के बड़े नेताओं और विपक्षी दिग्गजों के कारण हाईप्रोफाइल सीटों पर मुकाबला कड़ा बना हुआ है. सियासी जानकारों का मानना है कि इन मुकाबलों के नतीजे आने वाले दिनों में सत्ता की दिशा तय करेंगे. इस बार तमिलनाडु में 85 परसेंट मतदान दर्ज किया गया है. मतदान में महिलाओं की भारी भागीदारी रही है. आईए आपको बताते हैं कौन सी “टॉप फाइव” सीटें इस बार चर्चा के केंद्र में हैं.
कोलाधुर विधानसभा सीट पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. स्टालिन अपने गढ़ को बचाने की कोशिश में हैं. उनका मुकाबला एआईएडीएमके के सैदाई दुरैसामी से है, जिन्हें बीजेपी गठबंधन का समर्थन हासिल है. इस सीट पर जीत का अंतर डीएमके की सूबे में परफोर्मेंस की ओर इशारा करने वाला होगा.
चेपॉक - तिरूवल्लिकेनी सीट को यूं तो डीएमके का मजबूत गढ़ माना जाता है. इस सीट पर उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन मैदान में हैं. उनका मुकाबला एआईएडीएमके के एवीए कसाली से है, हालांकि मैदान में अन्य उम्मीदवार भी हैं. सियासी पंडितों का मानना है कि इस सीट पर जीत का अंतर शहरी मतदाताओं का मूड बताने वाला होगा.
पेरम्बूर सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां अभिनेता से नेता बने विजय चुनावी मैदान में हैं. उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के चलते यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. डीएमके और अन्य दलों के उम्मीदवारों के साथ ही यह सीट बेहद रोमांचक बन गई है.
एडप्पादी विधानसभा सीट पर एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी हुई है. अपने गढ़ में जीत उन्हें विपक्ष में मजबूत बनाएगी, जबकि हार पार्टी के भविष्य पर गहरा असर डाल सकती है.
करूर विधानसभा सीट पर डीएमके, एआईएडीएमके, बीजेपी और टीवीके के उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है. सियासी पंडितों के मुताबिक स्थानीय मुद्दों और हालिया विवादों के कारण यह सीट स्विंग सीट बन गई है, जो सूबे के व्यापक रूझानों को प्रभावित कर सकती है. अब सबकी नजर सोमवार को होने वाली मतगणना पर है, जहां इन सीटों के नतीजे तमिलनाडु की सत्ता की दिशा तय करेंगे.