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खड़गे ने पीएम मोदी को बता दिया 'आतंकवादी', बवाल बढ़ने पर मांगने लगे माफी; कहा- मेरा यह मतलब नहीं था

तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को 'आतंकवादी' कहकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि मोदी जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों को आतंकित कर रहे हैं और लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं.

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खड़गे ने पीएम मोदी को बता दिया 'आतंकवादी', बवाल बढ़ने पर मांगने लगे माफी; कहा- मेरा यह मतलब नहीं था
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: तमिलनाडु के चुनावी रणक्षेत्र में प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने तीखे तेवरों से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार पर चौतरफा प्रहार करते हुए कई गंभीर और विवादित आरोप लगाए. खड़गे ने न केवल प्रधानमंत्री की तुलना ऐसे व्यक्तित्व से की जो समानता के सिद्धांतों का विरोधी है, बल्कि अन्नाद्रमुक को भी आड़े हाथों लिया. इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भाजपा को घेरते हुए मतदाताओं से बड़ी अपील की.

तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को 'आतंकवादी' कहकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि मोदी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखते हैं. जब उनके शब्दों पर सवाल उठे, तो खड़गे ने तुरंत अपना बचाव किया और स्पष्ट किया कि उनके कहने का तात्पर्य प्रधानमंत्री द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से विपक्षी दलों को 'आतंकित' करने से था. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ईडी और सीबीआई के जरिए विरोधियों को डराने का काम कर रही है.

अन्नाद्रमुक और भाजपा गठबंधन पर हमला

खड़गे ने अन्नाद्रमुक पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भाजपा का समर्थन करके महान नेता अन्नादुरई के सिद्धांतों को कमजोर कर रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि पेरियार और अंबेडकर की इस पवित्र भूमि पर अन्नाद्रमुक ऐसे लोगों से कैसे जुड़ सकती है जो समानता में विश्वास नहीं रखते. उनके अनुसार, यह गठबंधन तमिलनाडु की विशिष्ट पहचान और गौरवशाली मूल्यों के साथ खुला विश्वासघात है. उन्होंने लोगों को इस राजनीतिक 'जाल' से बचने की सलाह दी और वैज्ञानिक सोच वाली वैचारिक मजबूती पर विशेष जोर दिया.

महिला आरक्षण और मनुवाद का आरोप

महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर खड़गे ने भाजपा और आरएसएस को 'मनुवादी' राजनीति का रक्षक बताया. उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक समझते हैं, उन्हें महिला कल्याण पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इस विधेयक को लेकर जनता को खुलेआम गुमराह कर रहे हैं. खड़गे ने मांग की कि यदि भाजपा की नीयत साफ है, तो उसे मौजूदा सीटों में ही तुरंत महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का साहस दिखाना चाहिए.

द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन का विजन

खड़गे ने द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को तमिलनाडु की प्रगति का एकमात्र रास्ता बताया. उन्होंने वादा किया कि यह गठबंधन राज्य में समावेशी विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करेगा. खड़गे ने कामराज और करुणानिधि जैसे दूरदर्शी नेताओं की विरासत का हवाला देते हुए मतदाताओं से इस अटूट गठबंधन को मजबूत करने का आग्रह किया. उनके अनुसार, कांग्रेस हमेशा तमिलनाडु के अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी. उन्होंने वैज्ञानिक सोच और सामाजिक न्याय को इस मजबूत गठबंधन का मुख्य आधार स्तंभ बताया और समावेशी भविष्य का वादा किया.