असम विधानसभा चुनाव की मतगणना आज यानी सोमवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई है. राज्य के सभी मतगणना केंद्रों पर सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती जारी है. नियम के मुताबिक पहले बैलेट यानी डाक मतपत्रों की गिनती हो रही है, इसके बाद ईवीएम मशीनों के वोटों की गणना शुरू होगी. इस चुनाव का नतीजा दोपहर तक स्पष्ट होने की उम्मीद है.
इस बार असम विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है. 9 अप्रैल को हुए मतदान में कुल 126 सीटों के लिए 722 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 59 महिला प्रत्याशी शामिल हैं. भारी मतदान को देखते हुए विपक्षी दलों को विश्वास है कि जनता सरकार बदलाव चाहती है.
कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 99 उम्मीदवार उतारे हैं. भाजपा ने 90, एआईयूडीएफ ने 30, असम गण परिषद ने 26, यूपीपीएल ने 19 और बीपीएफ ने 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए. आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के अलावा 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में थे. चुनाव मुख्य रूप से सत्तारूढ़ भाजपा-नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी मोर्चे के बीच माना जा रहा है.
भाजपा ने पहचान, विकास और सुरक्षा के मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ा. पार्टी ने मतदाताओं को चेतावाया कि उसकी हार होने पर अवैध घुसपैठिए और 'मिया' राजनीति फिर सक्रिय हो जाएगी तथा भूमि पर कब्जा बढ़ सकता है. दूसरी ओर, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और एनडीए सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए. विपक्ष का कहना है कि विकास के नाम पर केवल कुछ खास वर्गों को फायदा पहुंचाया गया, जबकि आम जनता की समस्याएं बनी रहीं.
इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत का फैसला आज होगा. सबसे पहला नाम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा है. जो अपने गढ़ जालुकबारी से छठी बार चुनाव लड़ रहे हैं. 2001 से भाजपा का मजबूत किला रही यह सीट उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उनका मुकाबला कांग्रेस की बिदिशा नियोग से है. दूसरा नाम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई का है. जोरहाट सीट से गोगोई कांग्रेस की खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं.
उनका सामना भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से है. इनके अलावा एआईयूडीएफ प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल और देबब्रत सैकिया के नाम पर भी चर्चा है. भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में एजीपी, यूपीपीएल और बीपीएफ मुख्य सहयोगी हैं. विपक्षी मोर्चे में कांग्रेस के अलावा रायजोर दल, असम जातीय परिषद, माकपा और अन्य छोटे दल शामिल हैं.