महिला ने दिल्ली मेट्रो में ही बच्चे को करवा दी पॉटी, इंटरनेट यूजर बोले- भारतीय अच्छी चीजों के लायक नहीं

दिल्ली मेट्रो की यात्रा से जुडी एक घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है. एक यात्री ने दावा किया कि एक महिला ने वॉशरूम की जानकारी मिलने के बावजूद मेट्रो के कोच में अपने बच्चे को शौच करवा दिया.

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Shanu Sharma

दिल्ली मेट्रो में सफर कर रही एक यात्री ने रेडिट पर अपने अनुभव को साझा किया. यात्री के मुताबिक, यह घटना जनपथ और सचिवालय के बीच यात्रा के दौरान हुई. उस समय मेट्रो का कोच लगभग खाली था. इसी दौरान कई बच्चों के साथ सफर कर रही एक महिला ने यात्री से टॉयलेट के बारे में पूछा.

यात्री ने महिला को बताया कि मेट्रो के हर स्टेशन पर यात्रियों के लिए वॉशरूम की सुविधा उपलब्ध होती है और उसे वहां जाने का रास्ता भी समझाने की कोशिश की.

वॉशरूम की जगह कोच में ही बच्चे को कराया शौच

यात्री के अनुसार, महिला इस बात से सहमत नहीं हुई और उसने सवाल किया कि क्या बच्चा मेट्रो की पटरियों के पास शौच कर सकता है. यात्री ने उसे ऐसा बिल्कुल नहीं करने की सलाह दी. उनका कहना था कि शायद महिला पहली बार मेट्रो में सफर कर रही थी. इसके बाद यात्री ने बातचीत आगे बढाने के बजाय अपना ध्यान फोन पर लगा लिया. कुछ देर बाद जब उन्होंने ऊपर देखा तो कथित तौर पर महिला अपने बच्चे की पैंट उतार रही थी. यात्री का दावा है कि महिला ने मेट्रो के कोच में ही बच्चे को शौच करा दिया.


पोस्ट के मुताबिक, घटना के बाद महिला ने पानी की बोतल की मदद से बच्चे को साफ किया. यात्री ने बताया कि पास के दूसरे कोच में भी कुछ लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. यात्री खुद भी इस स्थिति को देखकर हैरान रह गई और कुछ कह नहीं पाई.

नागरिक समझ पर फिर उठे सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए स्वच्छता और दूसरे यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

एक यूजर ने ऐसी ही घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उसने मेट्रो स्टेशन पर एक महिला को अपने छोटे बच्चे को पेशाब कराने में मदद करते देखा था, जबकि पास में वॉशरूम मौजूद था. वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि केवल गलत व्यवहार देखने के बाद चुप रहना भी समस्या का हिस्सा है. उनका तर्क था कि यात्रियों को ऐसी परिस्थितियों में शांत तरीके से संबंधित व्यक्ति को सही सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए समझाना चाहिए.