मैंगो शेक के शौकीन सावधान! गुजरात में पकड़े गए सड़े और फंगस लगे आम, सामने आया वीडियो
भीषण गर्मी के बीच गुजरात में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सड़े-गले आमों का भारी स्टॉक जब्त किया है. इन फंगस लगे आमों का इस्तेमाल मैंगो शेक बनाने में होना था.
कड़कड़ाती धूप और झुलसाने वाली गर्मी से राहत पाने के लिए इन दिनों लोग बाजारों में शीतल पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं. चिलचिलाती दुपहरी में मैंगो शेक लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. अधिकांश लोग आलस या स्वाद के चक्कर में घर पर बनाने के बजाय बाजार की दुकानों पर जाकर मैंगो शेक पीना ज्यादा पसंद करते हैं. लेकिन जूस के शौकीनों को सावधान करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो सीधे आपकी सेहत से जुड़ी है.
गुजरात पुलिस और राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. अधिकारियों ने अचानक छापेमारी कर आमों की ऐसी पेटियां बरामद की गई हैं, जिन्हें देखकर किसी का भी जी मिचला जाए. इन पेटियों में रखे फल पूरी तरह से गल चुके थे और किसी भी सूरत में इंसानी इस्तेमाल के लायक नहीं थे.
सड़े और फंगस लगे फलों का स्टॉक
खाद्य सुरक्षा विभाग की एनफोर्समेंट विंग ने मौके से जो स्टॉक जब्त किया है, उसकी स्थिति बेहद डरावनी है. शुरुआती जांच में सामने आया कि मैंगो शेक के नाम पर परोसे जाने वाले इस घोल के लिए बेहद घटिया, कीड़े लगे और काले पड़ चुके आमों को जमा किया गया था. कई फलों पर तो सफेद फफूंद यानी फंगस साफ तौर पर जमा हो चुकी थी, जिन्हें काटकर सीधे मिक्सी में पीसने की तैयारी थी.
सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल
इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे लालची कारोबारी चंद पैसों के मुनाफे के लिए लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे थे. सड़े हुए फलों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि इन्हें पीने के बाद कोई भी स्वस्थ व्यक्ति गंभीर रूप से फूड प्वाइजनिंग और पेट की बीमारियों का शिकार हो सकता है.
अपनी गाढ़ी कमाई से बीमारी खरीदने का सच
अक्सर हम दुकानों की चकाचौंध और ठंडे स्वाद के फेर में यह भूल जाते हैं कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है. इस खुलासे ने साबित कर दिया है कि बाहर का असुरक्षित मैंगो शेक पीना अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद करके बीमारियों को खुला निमंत्रण देने जैसा है. सवाल यह उठता है कि गर्मियों के इस सीजन में देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजाना ऐसे कितने टन सड़े-गले आम आम जनता के पेट में उतारे जा रहे होंगे.