ऋषिकेश में जनसुनवाई में दौरान घुसा सांड, जमकर मचाया तांडव, वीडियो में देखें कर्मचारियों ने कैसे दौड़ लगाकर बचाई जान
ऋषिकेश के चौदह बीघा स्थित रामलीला मैदान में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान निराश्रित गोवंश मैदान में घुस आया. एक सांड़ विभागीय स्टॉल तक पहुंच गया, जिससे अफरा तफरी मच गई.
ऋषिकेश: उत्तराखंड के ऋषिकेश में 14 बीघा स्थित रामलीला मैदान में जन जन की सरकार जन जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान अजीब स्थिति बन गई. शिकायतें सुनने पहुंचे अधिकारियों और कर्मचारियों को अचानक मैदान में घुसे सांड़ों से बचने के लिए भागना पड़ा. कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ था. लोग सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गोवंश, बहते सीवर और टूटी सड़कों की शिकायतें लेकर पहुंचे थे. इसी बीच निराश्रित पशुओं का एक झुंड कार्यक्रम स्थल में दाखिल हो गया.
वहीं मौजूद लोगों के मुताबिक झुंड में शामिल एक सांड़ सीधे विभागीय स्टॉल की ओर बढ़ गया. कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे. कुछ देर के लिए पूरे मैदान में अफरा तफरी का माहौल बन गया. लोगों का कहना है कि रामलीला मैदान से सटे पुल पर अक्सर सांड़ों का जमावड़ा लगा रहता है. कई बार इन्हें हटाने की मांग उठ चुकी है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
शिविर में उठीं कई अहम मांगें
कार्यक्रम में अलग अलग विभागों के स्टॉल लगाए गए थे. ऊर्जा निगम के स्टॉल पर एसडीओ नरेंद्र नेगी ने उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की जानकारी दी. उत्तराखंड क्रांति दल के नेता विकास रयाल ने गंगा में गिर रहे सीवर नालों को बंद करने की मांग की. उनका कहना था कि निराश्रित गोवंश के कारण कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और आम लोग परेशानी झेल रहे हैं.
यूकेडी के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र भंडारी ने चंद्रभागा नदी क्षेत्र में खनन कराने और खाली जमीन पर पार्किंग विकसित करने का सुझाव दिया. साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और वार्ड नंबर नौ में निर्माणाधीन पंचायत भवन का काम शुरू करने की मांग की.
उम्मीद से कम रही लोगों की भागीदारी
शिविर में केवल 21 फरियादी सीधे शिकायत लेकर पहुंचे. हालांकि विभिन्न स्टॉल पर कुल 441 लोगों ने पंजीकरण कराया और 146 लोगों ने स्वास्थ्य जांच कराई. कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद मुनि की रेती ढालवाला की अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, एसडीएम आशीष घिल्डियाल और अन्य अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम के लिए बड़ा पंडाल सजाया गया था और काफी संख्या में कुर्सियां लगाई गई थीं. लेकिन शिविर की जानकारी पर्याप्त रूप से लोगों तक नहीं पहुंच सकी. नगर पालिका के वार्डों में मुनादी न होने के कारण कई लोगों को कार्यक्रम की सूचना ही नहीं मिली. जन सुनवाई के बीच सांड़ों की एंट्री ने यह साफ कर दिया कि निराश्रित पशुओं की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है. सवाल यह है कि क्या प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाएगा या ऐसे दृश्य फिर दोहराए जाएंगे.
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