मेघालय खदान विस्फोट में जिसे मृत मानकर किया गया अंतिम संस्कार, वह खुद चलकर पहुंचा घर; पुलिस जांच पर उठे सवाल
मेघालय के अवैध कोयला खदान विस्फोट में मृत घोषित किए गए श्रमिक श्यामबाबू सिन्हा अंतिम संस्कार के बाद जीवित घर लौट आए हैं. इस चमत्कार ने शिनाख्त की प्रक्रिया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
नई दिल्ली: मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में 5 फरवरी को हुए एक बेहद भीषण खदान विस्फोट ने पूरे देश को दहला कर रख दिया था. एक अवैध 'रैट-होल' कोयला खदान में हुए इस शक्तिशाली धमाके के बाद कुल 31 श्रमिकों को आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया गया था. इन्ही अभागे मृतकों की सूची में पड़ोसी राज्य असम के श्रीभूमि जिले के रहने वाले श्यामबाबू सिन्हा का नाम भी प्रमुखता से शामिल था. परिजनों ने नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार तक कर दिया था.
म्यानसांगट गांव के सुदूर थांगस्कू इलाके में स्थित इस अनाधिकृत कोयला खदान में हुआ विनाशकारी धमाका संभवतः डायनामाइट के गलत और असुरक्षित इस्तेमाल से हुआ था. खदान के भीतर की स्थिति इतनी भयावह और जोखिम भरी थी कि 9 फरवरी को राज्य सरकार ने वहां चल रहे तलाशी और बचाव अभियान को पूरी तरह बंद करने का कठिन फैसला लिया. विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत तकनीकी जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला था कि खदान के मलबे में अब किसी भी जीवित व्यक्ति के बचे होने की कोई संभावना नहीं है.
मौत को मात देकर सुखद वापसी
असम के राताबारी थाना क्षेत्र के निवासी श्यामबाबू सिन्हा जब अचानक अपने गांव पहुंचे, तो वहां का पूरा माहौल ही पूरी तरह बदल गया. जिस इंसान को लोग मृत मानकर मिट्टी दे चुके थे, उसे अपनी आंखों के सामने सुरक्षित और जिंदा खड़ा देख ग्रामीण और परिजन बुरी तरह सहम गए. उनकी यह वापसी किसी चमत्कारिक फिल्मी कहानी से कम नहीं है. श्यामबाबू की मौजूदगी ने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं और अब पूरे इलाके में यह घटना चर्चा का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला विषय बन चुकी है.
शिनाख्त की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
श्यामबाबू के जिंदा लौटने से अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वह शव आखिर किसका था जिसका अंतिम संस्कार उनके नाम पर किया गया. शव सौंपने से पहले अपनाई गई शिनाख्त की प्रक्रिया अब पूरी तरह पुलिस जांच के घेरे में है. क्या यह घबराहट में की गई मानवीय गलती थी या कागजी दस्तावेजों की भारी कमी? अधिकारियों के लिए अब यह जवाब देना मुश्किल हो रहा है कि बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण के शव परिजनों को आखिर कैसे सौंप दिया गया था.
जांच का तेजी से बढ़ता दायरा
इस बीच, खदान विस्फोट की जांच अब पहले से और भी अधिक तेज कर दी गई है. जांच के दौरान अवैध खनन नेटवर्क और सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी के चौंकाने वाले आरोप लगातार सामने आ रहे हैं. धमाके के पीछे किसी बड़ी साजिश या विस्फोटकों के बेहद असुरक्षित रख-रखाव की आशंका ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है. पुलिस अब हर उस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है जो इस अवैध धंधे और भयानक दुर्घटना के पीछे छिपी हुई है ताकि सच सामने आए.
एक अनसुलझा और रहस्यमयी मामला
जो घटना शुरू में एक साधारण मगर दुखद दुर्घटना लग रही थी, वह अब एक बेहद जटिल और उलझे हुए आपराधिक मामले में बदल चुकी है. एक तरफ मृतकों की बढ़ती संख्या और दूसरी तरफ एक जिंदा लौटे श्रमिक की अनसुलझी पहेली ने प्रशासन की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा दिया है. यह मामला न केवल अवैध खनन की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि संकट के समय तंत्र की विफलता और शिनाख्त की गंभीर खामियों को भी अब सरेआम बेनकाब कर रहा है जिससे न्याय की गुहार तेज हुई है.