लैपटॉप तोड़ा, बिस्तर छीनकर जमीन पर सुलाया....12वीं में 57% आने पर पिता ने बेटे को दी सजा
सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 57.4 प्रतिशत अंक आने पर एक नाराज पिता द्वारा बेटे का लैपटॉप तोड़ने और उसे फर्श पर सोने के लिए मजबूर करने का दुखद मामला सामने आया है.
नई दिल्ली: बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आते ही हर साल देश भर में बच्चों के ऊपर अच्छे नंबर लाने का एक मानसिक दबाव दिखने लगता है. हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने भारतीय परिवारों में पढ़ाई को लेकर बने अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल पर दोबारा बहस छेड़ दी है. सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक अंक न आने पर एक पिता का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने अपने ही बेटे का सब कुछ छीन लिया. इस घटना से छात्र गहरे आघात में है.
पीड़ित छात्र ने सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा में 57.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जो उसके पिता की उम्मीदों से काफी कम थे. रिजल्ट देखते ही पिता आपे से बाहर हो गए और उन्होंने गुस्से में आकर छात्र का कीमती लैपटॉप पटक कर तोड़ दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने सजा के तौर पर बेटे से उसका कमरा और बिस्तर तक छीन लिया. अब वह बेसहारा छात्र अपने ही घर में फर्श पर सोने को विवश है, जिससे पारिवारिक संवेदनशीलता खत्म होती दिख रही है.
रेडिट पर बयां किया दर्द
इस मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से टूट चुके छात्र ने अपने टूटे हुए लैपटॉप की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'रेडिट' पर साझा की है. फर्श पर बिखरे पड़े गैजेट के टुकड़ों के साथ उसने अपनी आपबीती बयां करते हुए लिखा कि वह नतीजों के बाद से लगातार अपने ही घर में मौखिक, मानसिक और शारीरिक दुर्व्यवहार का सामना कर रहा है. छात्र की यह बेबसी इंटरनेट पर आते ही तेजी से फैल गई और लोग इस पर जमकर अपनी राय दे रहे हैं.
भारतीय परिवारों का कड़वा सच
यह घटना हमारे समाज के कई घरों में पढ़ाई को लेकर बने जहरीले और हिंसक माहौल को पूरी तरह उजागर करती है. आज के दौर में अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों की वास्तविक क्षमता को समझे बिना उनसे इतनी ऊंची अपेक्षाएं पाल लेते हैं कि जरा सी कम रैंक आने पर वे हिंसक व्यवहार पर उतर आते हैं. बच्चों को अंकों की मशीन समझना और असफलता पर उनके साथ ऐसा क्रूर बर्ताव करना उनके भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह बर्बाद कर देता है.
इंटरनेट यूजर्स का फूटा गुस्सा
छात्र की इस दर्दनाक पोस्ट पर रेडिट यूजर्स ने अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं. एक यूजर ने लिखा कि भारतीय माता-पिता का यह तरीका बेहद निराशाजनक है; वे गुस्से में खुद अपनी चीजें तोड़ते हैं और बाद में बच्चों पर पैसा बर्बाद करने का आरोप मढ़ देते हैं. कई अन्य युवाओं ने भी स्वीकार किया कि वे भी अपने घरों में इसी तरह के दमघोंटू माहौल से गुजर रहे हैं, जहां नंबर कम आने पर उन्हें अपराधी की तरह देखा जाता है.
विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, परीक्षा के अंकों को प्रतिष्ठा का सवाल बनाने वाले ऐसे व्यवहार से बच्चों में अवसाद, गंभीर चिंता और आत्मविश्वास की भारी कमी होने लगती है. शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चे का सर्वांगीण विकास होना चाहिए, न कि सिर्फ मार्कशीट के अंक. रेडिट कम्युनिटी ने इस पीड़ित छात्र को ढांढस बंधाते हुए सलाह दी है कि वह इस कठिन समय में हिम्मत न हारे और आगे की पढ़ाई पर ध्यान दे ताकि भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर इस माहौल से बाहर निकल सके.