60 घाव, टूटी हड्डियां और बाहर निकली किडनी; जेब में रखी एक चीज ने शख्स की विशाल भालू से बचाई जान

भालू के हमले में कॉलिन डॉवलर के शरीर पर करीब 60 गहरे घाव हुए. किडनी तक दिखाई देने लगी, फिर भी छोटे चाकू और हिम्मत से उन्होंने अपनी जान बचा ली.

Grok
Reepu Kumari

कनाडा के जंगल में साइकिल चला रहे कॉलिन डॉवलर पर एक विशाल भालू ने अचानक हमला कर दिया. हमले में उनके शरीर पर करीब 60 गहरे घाव हुए और एक चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी किडनी तक दिखाई देने लगी. भालू उन्हें झाड़ियों में खींच ले गया था और कॉलिन को लगा कि अब वह परिवार से कभी नहीं मिल पाएंगे. लेकिन जेब में रखा छोटा चाकू उनकी जिंदगी बचाने का आखिरी सहारा बना.

जंगल में अचानक सामने आ गया भालू

ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाले कॉलिन डॉवलर एक दिन साइकिल लेकर जंगल की ओर निकले थे. वह माउंट डूगी के पास एक संकरे रास्ते से गुजर रहे थे. तभी अचानक उनकी नजर एक बड़े ग्रिजली भालू पर पड़ी. कॉलिन पहले भी काले भालू देख चुके थे, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि शांत रहने पर जानवर वहां से चला जाएगा. लेकिन इस बार स्थिति अलग थी. भालू लगातार उनकी ओर देख रहा था और धीरे-धीरे दूरी कम करता जा रहा था.

साइकिल को बना लिया बचाव का सहारा

कॉलिन ने तुरंत साइकिल से उतरकर उसे अपने और भालू के बीच कर लिया. उनके पास एक डंडा भी था, जिसे उन्होंने जानवर से दूरी बनाए रखने के लिए आगे कर रखा था. भालू ने डंडे को मुंह से पकड़कर दूर फेंक दिया. इसके बाद कॉलिन ने अपना खाने का सामान भी उसकी तरफ फेंका, लेकिन भालू का ध्यान उस पर नहीं गया. जानवर लगातार उनकी ओर बढ़ता रहा और कुछ ही पलों में हालात बेहद खतरनाक हो गए.


पहले धक्का दिया, फिर कर दिया हमला

भालू ने पहले कॉलिन को पंजे से धक्का दिया. उन्होंने अपनी साइकिल भी उसकी तरफ फेंकी, लेकिन जानवर पीछे नहीं हटा. इसके बाद भालू ने अचानक झपट्टा मार दिया. उसने कॉलिन को अपने जबड़ों में दबाया और करीब 30 से 40 फीट दूर झाड़ियों की ओर खींच ले गया. इसके बाद उसने उनके शरीर को बुरी तरह नोचना शुरू कर दिया. कॉलिन को अपनी जांघ की हड्डी पर भी दांतों की चोट महसूस हो रही थी.

परिवार को याद कर लगा जिंदगी खत्म हो गई

हमले के दौरान कॉलिन को लगा कि शायद अब वह जीवित नहीं बचेंगे. उनके सामने पत्नी और बच्चों की तस्वीर घूमने लगी. उन्हें लगा कि वह अपने परिवार से दोबारा कभी नहीं मिल पाएंगे. इसी बीच उन्हें अपनी जेब में रखे छोटे चाकू की याद आई. भालू ने उन्हें दबा रखा था, फिर भी उन्होंने किसी तरह चाकू निकाला और जानवर की गर्दन पर वार कर दिया. चोट लगने के बाद भालू पीछे हटा और वहां से चला गया.

खून रोकने के लिए खुद बनाया उपाय

भालू के जाने के बाद कॉलिन की हालत बेहद खराब थी. शरीर से लगातार खून बह रहा था और उनके पास उपचार का कोई सामान नहीं था. उन्होंने अपनी कमीज की आस्तीन काटकर पैर पर बांधी, ताकि खून का बहाव कम किया जा सके. इसके बाद उन्होंने अपनी साइकिल उठाई और मदद की तलाश में निकल पड़े.

गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने करीब 45 मिनट तक साइकिल चलाई. उनका लक्ष्य किसी तरह ऐसी जगह पहुंचना था, जहां से सहायता मिल सके.

45 मिनट बाद मिली जिंदगी की मदद

काफी देर तक साइकिल चलाने के बाद कॉलिन एक लकड़ी काटने वाले मजदूरों के ठिकाने तक पहुंचे. वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनकी हालत देखी और तुरंत मदद शुरू कर दी. घावों को संभालने के बाद हवाई एंबुलेंस बुलाई गई. करीब एक घंटे बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर चोटों का उपचार शुरू किया. जांच में उनके शरीर पर करीब 60 गहरे और छेद जैसे घाव मिले. एक चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी किडनी तक दिखाई देने लगी थी.

साढ़े छह घंटे तक चला ऑपरेशन

कॉलिन की जान बचाने के लिए चिकित्सकों ने करीब साढ़े छह घंटे तक उनका ऑपरेशन किया. इसके बाद उन्हें लगभग 40 दिन अस्पताल में रहना पड़ा. लंबे इलाज और कठिन स्वास्थ्य लाभ के बाद वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौटे. इतने गंभीर हमले के बावजूद उनका बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना गया.

हादसे से बचने के बाद भी नहीं छोड़ी साइकिलिंग

इतने खौफनाक अनुभव के बाद भी कॉलिन ने जंगल और साइकिल चलाने का शौक नहीं छोड़ा. हालांकि, उन्होंने जंगली जानवरों से दूरी और सुरक्षा को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी शुरू कर दी. उनकी कहानी यह बताती है कि बेहद मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान अगर हिम्मत न हारे तो बचने का रास्ता तलाश सकता है. मौत के बेहद करीब पहुंचने के बावजूद कॉलिन ने हार नहीं मानी और आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली.