सुकन्या अकाउंट में कब मिलेगा पूरा पैसा? जानें क्या है ये '21 साल' का असली नियम
सुकन्या समृद्धि योजना में 21 साल के नियम को लेकर लोगों में काफी भ्रम है. इस लेख में जानिए खाते की मैच्योरिटी, पैसे निकालने के नियम और जरूरी बातें आसान भाषा में.
सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सरकार की एक खास योजना है. इसमें माता पिता अपनी बेटी के नाम पर निवेश करके उसके भविष्य के लिए एक मजबूत फंड तैयार कर सकते हैं. यह योजना खास तौर पर शिक्षा और शादी जैसे बड़े खर्चों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. अक्सर माता पिता इस योजना के नियमों को लेकर उलझन में रहते हैं. सबसे ज्यादा सवाल 21 साल के नियम को लेकर होता है. कई लोग मानते हैं कि जब बेटी 21 साल की हो जाती है तब पैसा मिल जाता है. लेकिन असल नियम इससे अलग है.
क्या है 21 साल का असली नियम?
सुकन्या योजना में 21 साल का संबंध बेटी की उम्र से नहीं बल्कि खाते से होता है. इसका मतलब ये है कि खाते की मैच्योरिटी खाता खोलने की तारीख से 21 साल बाद होती है और बेटी की उम्र इसमें सीधा आधार नहीं होती. उदाहरण से समझें, अगर आपने बेटी के 10 साल की उम्र में खाता खोला तो खाता 21 साल बाद मैच्योर होगा यानि बेटी की उम्र तब 31 साल होगी. यही वह बात है जिसे लेकर ज्यादातर लोग भ्रमित रहते हैं.
कब तक करना होता है निवेश
इस योजना में निवेश की भी एक समय सीमा तय होती है. खाता खुलने के बाद केवल 15 साल तक ही पैसा जमा करना होता है. इसके बाद अगले 6 साल तक बिना निवेश के भी ब्याज मिलता रहता है. कुल मिलाकर 21 साल बाद खाता पूरी तरह मैच्योर हो जाता है. यह फीचर इस योजना को और भी फायदेमंद बनाता है.
क्या बीच में पैसे निकाले जा सकते हैं. यह भी एक बड़ा सवाल है जो हर माता पिता के मन में आता है. इसका जवाब है हां. लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें हैं. जिसमें सबसे पहले ये है कि बेटी की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए. शिक्षा या शादी जैसे जरूरी काम के लिए पैसा निकाला जा सकता है. कुल जमा राशि का केवल 50 प्रतिशत ही निकाला जा सकता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि भविष्य के लिए कुछ पैसा सुरक्षित रहे.
इस योजना के फायदे
सुकन्या योजना कई तरह से लाभ देती है
- सुरक्षित और सरकारी गारंटी वाली योजना
- अच्छी ब्याज दर
- टैक्स में छूट का फायदा
- लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार
इन वजहों से यह योजना माता पिता के बीच काफी लोकप्रिय है.