मुंबई: भारतीय सिनेमा के शानदार एक्टर सतीश कौशिक को लोग उनके नाम से कम और उनके किरदारों से ज्यादा पहचानते हैं. उन्होंने हर किरदार में खुद को इस तरह ढाला कि वह किरदार हमेशा के लिए यादगार बन गया है. कॉमेडी हो या गंभीर अभिनय, सतीश कौशिक हर रोल में नई ऊर्जा लेकर आते थे. यही वजह है कि उन्होंने दर्शकों के दिल में एक अलग जगह बनाई है.
सतीश कौशिक का जन्म 13 अप्रैल 1956 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अभिनय का काफी शौक था. उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई की और फिर नेशनल स्कुल ऑफ ड्रामा से अभिनय सीखा. इसके बाद उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में ट्रेनिंग ली. यही वह समय था जब उनके सपनों को सही दिशा मिली और वह मुंबई आ गए.
करियर की शुरुआत में उन्हें छोटे रोल और सहायक निर्देशक के रूप में काम करना पड़ा. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. 1983 की फिल्म जानें भी दो यारों से उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई. हालांकि असली पहचान उन्हें मिस्टर इंडिया में निभाए गए कैलेंडर के किरदार से मिली. इसके बाद उन्होंने कई यादगार रोल किए जिसमें राम लखन में पप्पू पेजर, साजन चले ससुराल में मुथु स्वामी, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी में ज्योतिषी मामा जैसे किरदार शामिल हैं. इन सभी किरदारों ने उन्हें कॉमेडी का बादशाह बना दिया.
सतीश कौशिक सिर्फ एक्टर ही नहीं बल्कि एक सफल डायरेक्टर भी थे. उन्होंने तेरे नाम जैसी फिल्म को डायरेक्ट किया, जो आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है. उन्होंने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और दो बार फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड भी जीता.
सतीश कौशिक की जिंदगी का एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक पहलू नीना गुप्ता से जुड़ा है. नीना गुप्ता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह Vivian Richards के बच्चे के साथ प्रेग्नेंट थीं, तब समाज का दबाव बहुत ज्यादा था. वह बिना शादी के मां बनने जा रही थीं, जो उस समय एक बड़ा और साहसी फैसला था. ऐसे मुश्किल समय में सतीश कौशिक ने उनका साथ दिया. उन्होंने नीना गुप्ता को शादी का प्रस्ताव दिया और कहा कि वह बच्चे को अपना नाम देंगे.
सतीश कौशिक चाहते थे कि वह नीना गुप्ता की बेटी मसाबा गुप्ता को अपना नाम दें. यह कदम उस दौर में बेहद बड़ा और साहसी माना जाता था. हालांकि नीना गुप्ता ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने अकेले ही अपनी बेटी की परवरिश करने का फैसला लिया और समाज के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश किया.