डिजिटल ठगी में अब राहत की उम्मीद, 25,000 तक मिल सकता है मुआवजा; यहां जानिए कैसे
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने डिजिटल फ्रॉड से पीड़ित ग्राहकों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. नए ड्राफ्ट प्रस्ताव के तहत छोटे मूल्य के फ्रॉड (50,000 रुपये तक के नुकसान) में व्यक्ति को नुकसान का 85% या अधिकतम 25,000 रुपये मुआवजा मिल सकता है.
नई दिल्ली: आजकल यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट ट्रांसफर ने पैसे भेजना इतना आसान कर दिया है कि सेकंडों में काम हो जाता है. लेकिन इसी सुविधा के साथ डिजिटल ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. फर्जी कॉल, लिंक या मैसेज से लोग ठगे जा रहे हैं और अकाउंट से पैसे गायब हो जाते हैं. ऐसे में पीड़ितों के लिए पैसा वापस मिलना मुश्किल हो जाता था. अब आरबीआई ने इस समस्या पर गंभीरता दिखाई है.
6 मार्च 2026 को जारी ड्राफ्ट प्रस्ताव में छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजा देने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है. यह कदम ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएगा और बैंकिंग को सुरक्षित बनाएगा. आइए जानते हैं इसकी पूरी डिटेल्स और क्या करना होगा अगर ठगी हो जाए.
मुआवजे की सीमा और शर्तें क्या हैं
प्रस्ताव के अनुसार अगर डिजिटल ट्रांजेक्शन में फ्रॉड से 50,000 रुपये तक का नुकसान हुआ है, तो पीड़ित को नेट लॉस का 85% या 25,000 रुपये (जो कम हो) मुआवजा मिलेगा. यह रकम जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगी. छोटे नुकसान पर ज्यादातर हिस्सा आरबीआई उठाएगा, जबकि बैंक और प्राप्तकर्ता बैंक भी योगदान देंगे. इससे ग्राहकों को तुरंत राहत मिलेगी.
RBI ने कब और क्यों जारी किया ड्राफ्ट
6 मार्च 2026 को आरबीआई ने 'कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजेक्शंस' के फ्रेमवर्क की समीक्षा का ड्राफ्ट जारी किया. फरवरी में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति में इस दिशा में कदम उठाने की बात कही थी. यह नियम 1 जुलाई 2026 से इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस पर लागू हो सकता है. अभी तक 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं.
फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करें
ठगी होने पर सबसे जरूरी है तुरंत कार्रवाई. घटना के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को सूचित करें और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें. समय पर रिपोर्ट करने से मुआवजा प्रक्रिया शुरू होगी. बैंक को 5 दिनों में मुआवजा देने का प्रावधान है, फिर वह आरबीआई से रिम्बर्समेंट ले सकेगा.
किन मामलों में मिलेगा पूरा फायदा
अगर फ्रॉड बैंक की लापरवाही से हुआ हो, तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होगी और पूरा पैसा वापस मिलेगा. थर्ड-पार्टी ब्रिच में भी अगर 5 दिनों में रिपोर्ट की जाए, तो राहत मिलेगी. यह प्रस्ताव ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने और शिकायत निपटान को तेज करने पर फोकस करता है. छोटे फ्रॉड में अब डर कम होगा.
क्यों है यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण?
डिजिटल पेमेंट्स बढ़ने के साथ ठगी के मामले भी बढ़े हैं. यह मुआवजा स्कीम ग्राहकों को सुरक्षित महसूस कराएगी और बैंकिंग पर भरोसा मजबूत करेगी. एक बार की यह सुविधा लोगों को सतर्क भी रखेगी. अंतिम नियम आने के बाद डिजिटल दुनिया और सुरक्षित बनेगी. अगर आप डिजिटल बैंकिंग यूजर हैं, तो सतर्क रहें और शिकायत में देर न करें.