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बचाकर रखें अपना अनाज, अगले साल भयंकर सूखे की चपेट में आ सकता है भारत, जानें वजह

राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के मुताबिक, भारत में अगले साल मार्च-मई महीने के दौरान बेहद मजबूत अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है.

Sagar Bhardwaj
Edited By: Sagar Bhardwaj
बचाकर रखें अपना अनाज, अगले साल भयंकर सूखे की चपेट में आ सकता है भारत, जानें वजह

Super El Nino: इंसान की बढ़ती लालसा की वजह से मौसम में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे है. अब इस संबंध में एक बेहद चिंताजनक और डरावनी रिपोर्ट सामने आई है.

राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के मुताबिक, भारत में अगले साल मार्च-मई महीने के दौरान बेहद मजबूत अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है, जिसकी वजह से मौसम में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं जिसे 'सुपर अल नीनो' कहा जा रहा है.

NOAA के मुताबिक, साल 2024 में मजबूत अल नीनो आने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत तक है. अगर ऐसा हुआ तो भूमध्यरेखीय समुद्री सतह का तापमान औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो सकता है. इस बात की संभावना भी 30 प्रतिशत तक है कि तापमान 2 डिग्री तक बढ़ सकता है.

NOAA के अनुसार, 30 से 33 प्रतिशत इस बात की संभावना है कि यह प्रभाव ऐतिहासिक रूप से मजबूत हो सकता है और सुपर अल नीनो प्रभाव में बदल सकता है.

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह पर पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म होने लगता है जिसके चलते पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी पूर्व यानी अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर जाने लगता है. आमतौर पर ऐसा 2 से 7 साल तक के अनियमित अंतराल पर होता है.

क्या होता है सुपर अल नीनो?

जब समुद्र के ऊपर पानी का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है तो इसे मजबूत या स्ट्रॉन्ग अल नीनो कहते हैं. वहीं जब समुद्र का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक हो जाए तो इसे सुपर अल नीनो कहा जाता है.

भारत पर क्या होगा सुपर अल नीनो का असर

सुपर अल नीनो का सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ेगा. इसके कारण कुछ जगहों पर भयंकर सूखा पड़ सकता है. गौर करने वाली बात ये है कि पिछले 100 सालों में भारत में 18 पार सूखे जैसी स्थिति बनी है, जिसमें से 13 का संबंध अल नीनो प्रभाव रहा है.

इस साल अल नीनो की वजह से भारत में असामान्य बारिश हुई है, दलहन का रकबा 9 प्रतिशत तक घटा है और लगभग 8.68 लाख हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई है.

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