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EPFO के नियमों में बड़ा बदलाव, अब इमरजेंसी पड़ने पर निकाल पाएंगे 75% तक पैसा

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नियमों में बदलाव किया गया है. नए नियम के मुताबिक ईपीएफ सदस्यों को जरूरत के समय अपने खाते की जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा मिली है.

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Edited By: Shanu Sharma
EPFO के नियमों में बड़ा बदलाव, अब इमरजेंसी पड़ने पर निकाल पाएंगे 75% तक पैसा
Courtesy: Pinterest

नौकरी करने वाले लोगों के लिए ईपीएफ लंबे समय से रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन रहा है. नौकरी के दौरान वेतन का एक हिस्सा इस खाते में जमा होता है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए बचत तैयार करना है. हालांकि, अब सरकार ने ईपीएफ से जुड़े निकासी नियमों में बदलाव किया है.

लोकसभा में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने नए प्रावधानों की जानकारी दी. तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने सरकार से ईपीएफ राशि निकालने के बदले नियमों को लेकर सवाल किया था. इसके जवाब में सरकार ने बताया कि नए नियमों के तहत कर्मचारी कुछ परिस्थितियों में अपने ईपीएफ खाते से 75 प्रतिशत तक राशि निकाल सकते हैं.

किन जरूरतों के लिए निकाल सकेंगे पैसा?

नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों को कई जरूरी परिस्थितियों में ईपीएफ से आंशिक राशि निकालने की सुविधा दी गई है. इसमें बीमारी और इलाज से जुड़े खर्च प्रमुख रूप से शामिल हैं. इसके अलावा घर खरीदने, नया घर बनाने, मरम्मत या सुधार के काम के लिए भी निर्धारित शर्तों के तहत राशि निकाली जा सकती है.

होम लोन से जुड़े खर्चों के लिए भी निकासी का प्रावधान है. पढ़ाई और शादी के लिए भी ईपीएफ से पैसा निकालने की सुविधा जारी रहेगी. नए नियमों के अनुसार, सदस्यता के दौरान पढ़ाई के लिए अधिकतम 10 बार और शादी के लिए 5 बार तक राशि निकाली जा सकती है.

12 महीने की सदस्यता के बाद आसान निकासी

सरकार ने कई तरह की अग्रिम निकासी के लिए ईपीएफ सदस्य बनने की न्यूनतम अवधि घटाकर 12 महीने कर दी है. वहीं, इलाज जैसी जरूरतों के लिए निकासी की संख्या पर कोई निश्चित सीमा नहीं रखी गई है. हालांकि, हर निकासी पर लागू अन्य शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा. अगर किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वह अपने ईपीएफ खाते में जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकाल सकता है. बाकी 25 प्रतिशत राशि खाते में बनी रहेगी. इसका उद्देश्य यह है कि बेरोजगारी के दौरान कर्मचारी को आर्थिक मदद मिले और उसकी कुछ बचत भविष्य के लिए सुरक्षित भी रहे.

पूरा पैसा निकालने के लिए करना होगा इंतजार

नए नियमों में आंशिक निकासी को आसान किया गया है, लेकिन पूरी ईपीएफ राशि निकालने की प्रक्रिया में प्रतीक्षा अवधि बढ़ाई गई है. अंतिम ईपीएफ भुगतान के लिए अब 12 महीने का इंतजार करना होगा, जबकि ईपीएस से जुड़े निकासी लाभ के लिए 36 महीने की प्रतीक्षा अवधि रखी गई है.सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद कर्मचारियों को नौकरी बदलते समय जल्दबाजी में अपनी पूरी सेवानिवृत्ति बचत निकालने से रोकना है, ताकि भविष्य के लिए उनकी आर्थिक सुरक्षा बनी रहे.