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रिटायरमेंट के बाद 50 हजार रुपये महीना पेंशन और एकमुश्त 4 करोड़! जानें कैसे बनेगा इतना फंड?

एनपीएस लंबी अवधि में रिटायरमेंट फंड बनाने का प्रभावी विकल्प है. हालांकि वायरल दावों में बताए गए 80 प्रतिशत एकमुश्त और 20 प्रतिशत एन्युटी के नियम सभी निवेशकों पर लागू नहीं होते.

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Km Jaya

नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आय हर व्यक्ति की सबसे बड़ी जरूरत होती है. ऐसे में नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस लंबी अवधि में बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने का एक लोकप्रिय विकल्प माना जाता है. सही समय पर निवेश शुरू करने और लंबे समय तक नियमित योगदान करने पर निवेशक रिटायरमेंट के समय एकमुश्त बड़ी राशि के साथ मासिक पेंशन का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं.

अगर किसी व्यक्ति का लक्ष्य रिटायरमेंट के बाद हर महीने 50 हजार रुपये की पेंशन पाना है, तो इसके लिए पर्याप्त रिटायरमेंट फंड तैयार करना जरूरी होगा. उदाहरण के तौर पर यदि एन्युटी पर औसतन 6 प्रतिशत सालाना रिटर्न माना जाए, तो 50 हजार रुपये मासिक यानी 6 लाख रुपये सालाना पेंशन के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की एन्युटी खरीदनी पड़ सकती है. वास्तविक पेंशन एन्युटी की दर, कंपनी और उस समय की बाजार स्थितियों पर निर्भर करेगी.

क्या है नियम?

मौजूदा नियमों के अनुसार एनपीएस से रिटायरमेंट पर जमा राशि का अधिकतम 60 प्रतिशत हिस्सा टैक्स फ्री एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि कम से कम 40 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है. कुछ सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं. इसलिए निवेश से पहले अपने खाते की श्रेणी के अनुसार नियमों की जानकारी जरूर लें.


यदि किसी निवेशक के पास रिटायरमेंट के समय कुल 5 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाता है, तो 40 प्रतिशत यानी 2 करोड़ रुपये से एन्युटी खरीदी जा सकती है और शेष 60 प्रतिशत यानी लगभग 3 करोड़ रुपये एकमुश्त निकाले जा सकते हैं. इस स्थिति में मिलने वाली मासिक पेंशन एन्युटी की दर पर निर्भर करेगी. इसलिए 4 करोड़ रुपये एकमुश्त और केवल 20 प्रतिशत एन्युटी वाला दावा सभी एनपीएस खातों पर लागू नहीं होता.

कैसे बनता है बड़ा रिटायरमेंट फंड?

अगर कोई व्यक्ति 25 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करता है और लंबे समय तक नियमित निवेश करता है, तो अनुमानित 10 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न के आधार पर बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है. इसी तरह 30 या 35 वर्ष की उम्र में शुरुआत करने पर समान लक्ष्य हासिल करने के लिए हर महीने अधिक निवेश करना पड़ सकता है, क्योंकि निवेश की अवधि कम हो जाती है.