हर सुबह और शाम लाखों लोग मेट्रो में भीड़ के बीच अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं. धक्का लग जाना या सीट पर तनातनी हो जाना यहां आम है, पर कभी-कभी यही मामूली बात जानलेवा बन जाती है. हाल ही में दिल्ली मेट्रो में सीट को लेकर हुए झगड़े में एक शख्स को इतना पीटा गया कि इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. ऐसे में हर यात्री के लिए यह जानना जरूरी है कि मुसीबत में तुरंत मदद कैसे मिलेगी और कानून क्या कहता है.
मेट्रो कोच में दरवाजों के पास इमरजेंसी टॉक बैक बटन होता है. लड़ाई या आपात स्थिति में इसे दबाकर आप सीधे ट्रेन ऑपरेटर से बात कर सकते हैं. ऑपरेटर अगले स्टेशन पर सुरक्षा गार्ड को तुरंत सतर्क कर देता है. अगर आप स्टेशन या प्लेटफॉर्म पर हैं, तो कंट्रोल रूम या कस्टमर केयर सेंटर पहुंचें. प्लेटफॉर्म, एंट्री गेट और टिकट काउंटर पर सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं, उन्हें घटना की जानकारी दें.
दिल्ली मेट्रो की चौबीस घंटे सेवा वाली हेल्पलाइन का नंबर 155370 है. सीआईएसएफ सुरक्षा नियंत्रण के लिए 1911 मिलाया जा सकता है. आपातकालीन पुलिस सेवा 112 पर उपलब्ध है, जबकि मेट्रो कस्टमर केयर का नंबर 18001805014 है. इसके अलावा डीएमआरसी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी अपनी बात पहुंचाई जा सकती है. संकट की घड़ी में नंबर खोजने में समय न गंवाना पड़े, इसलिए इन्हें पहले से याद रखना समझदारी है.
मेट्रो रेलवे अधिनियम, 2002 के तहत मेट्रो में लड़ाई या हंगामा करने पर जुर्माना बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है. इतना ही नहीं, सुरक्षा अधिकारी ऐसे यात्री को उसी वक्त मेट्रो से बाहर भी कर सकते हैं. महिला कोच में बिना अनुमति घुसकर विवाद करने पर जुर्माना 5,000 रुपये तक पहुंच सकता है. प्रशासन और पुलिस इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हैं.
शांति भंग करने के मामले में बीएनएस की धारा 352 के तहत जानबूझकर गाली देने या उकसाने पर दो साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है. महिला के साथ अभद्र भाषा या अश्लील हरकत पर धारा 79 लगती है, जो गैरजमानती अपराध है. जान से मारने या चोट पहुंचाने की धमकी देने पर धारा 351 के तहत दो से सात साल की कैद का प्रावधान है. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों को पकड़ लेती है. बिना ठोस कारण अलार्म बटन दबाने पर भी जुर्माना लग सकता है.