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गेहूं, चावल और चीनी के एक्सपोर्ट से नहीं हटेगा बैन, पीयूष गोयल बोले- सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं

देश में गेहूं की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने मई 2022 में गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था. इसके अगले साल जुलाई 2023 में सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात पर भी बैन लगा दिया, वहीं अक्टूबर 2023 में सरकार ने चीनी के एक्सपोर्ट पर भी रोक लगाने का आदेश जारी किया था.

Sagar Bhardwaj

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि गेहूं, चावल और चीनी के निर्यात पर बैन हटाने के लिए फिलहाल सरकार के सामने कोई प्रस्ताव नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार का विदेशों से चीनी और गेहूं को आयात करने का कोई इरादा नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'गेहूं, चावल और चीनी के एक्सपोर्ट पर लगे बैन को हटाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है, साथ ही भारत गेहूं और चीनी का आयात नहीं करेगा.'

बढ़ती कीमतों की वजह से सरकार ने लगा दिया था बैन

बता दें कि देश में गेहूं की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने मई 2022 में गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था. इसके अगले साल जुलाई 2023 में सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात पर भी बैन लगा दिया, वहीं अक्टूबर 2023 में सरकार ने चीनी के एक्सपोर्ट पर भी रोक लगाने का आदेश जारी किया था.

पाबंदियों के कारण गिरेगा कृषि उत्पाद निर्यात

इससे पहले खबर आई थी कि गेहूं, चावल और चीनी के निर्यात पर पाबंदियों के कारण भारत के कृषि उत्पाद निर्यात में 4 अरब डॉलर तक की गिरावट आ सकती है.  वाणिज्य मंत्रालय और APEDA ने यह अनुमान पेश किया था.  आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अक्टूबर के दौरान APEDA के कृषि निर्यात बास्केट में 9 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है. इस दौरान यह आंकड़ा 1398.5 करोड़ डॉलर रहा जबकि पिछले साल एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट बास्केट 1542.3 करोड़ डॉलर था.

क्या है एक्सपोर्ट में गिरावट की प्रमुख वजह
बता दें कि कृषि उत्पादों में गिरावट की प्रमुख वजह गेहूं है जिसके निर्यात में 98 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है. इसके अलावा मिल वाले उत्पाद और गैर-बासमती चावल के निर्यात में क्रमश: 65 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की गिरावट आई है.

पाबंदी से भारत को मिल रहा बेहतर एक्सपोर्ट मूल्य

मोदी सरकार ने जुलाई 2023 में सभी गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी. इसके अलावा सरकार ने पक्के चावल के एक्सपोर्ट पर भी 20 प्रतिशत ड्यूटी लगाई है. कॉमर्स मिनिस्ट्री के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार के इन कदमों से बासमती और पक्के चावल के बेहतर एक्सपोर्ट मूल्य हासिल करने में मदद मिली है.