Budget 2024: डायरेक्ट टैक्स वे टैक्स होते हैं जो डायरेक्ट तौर पर टैक्स पेयर्स से सरकार वसूल करती है. इन्हें इनकम के स्रोत पर ही लगाया जाता है, इसलिए इनमें छिपा पाने की गुंजाइश कम होती है. भारत में डायरेक्ट टैक्सेस के दो मुख्य प्रकार हैं:
आयकर (Income Tax): यह व्यक्तियों और कंपनियों की कुल इनकम पर लगाया जाने वाला टैक्स है. भारत में आयकर स्लैब प्रणाली पर आधारित है, जिसका मतलब है कि इनकम के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग टैक्स दरें लागू होती हैं. आयकर का उद्देश्य सरकार को राजस्व प्राप्त करना और इनकम असमानता को कम करना है.
प्रॉपर्टी टैक्स (Wealth Tax): यह व्यक्तियों की कुल प्रॉपर्टी (जैसे कि जमीन, घर, सोना, शेयर आदि) पर लगाया जाने वाला टैक्स है. भारत में प्रॉपर्टी टैक्स 2015 में समाप्त कर दिया गया था, लेकिन राज्यों के पास अपने स्तर पर इसे लगाने का अधिकार है. प्रॉपर्टी टैक्स का उद्देश्य बड़े प्रॉपर्टी धारकों से राजस्व प्राप्त करना और प्रॉपर्टी असमानता को कम करना था.
भारतीय अर्थव्यवस्था में डायरेक्ट टैक्सेस का बहुत महत्व है. वे सरकार को राजस्व प्रदान करते हैं जिसका उपयोग देश के विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा आदि. साथ ही, डायरेक्ट टैक्स इनकम असमानता को कम करने में भी मदद करते हैं क्योंकि हाई इनकम वाले लोग कम इनकम वाले लोगों की तुलना में अधिक टैक्स चुकाते हैं.
हालांकि, डायरेक्ट टैक्सेस की आलोचना भी होती है. कुछ लोगों का मानना है कि ये टैक्स बहुत अधिक बोझ डालते हैं और आर्थिक विकास को बाधित करते हैं. यह सच है कि हाई टैक्स रेट निवेश और बचत को हतोत्साहित कर सकती हैं. इसलिए, सरकार को टैक्स दरों को संतुलित करने की आवश्यकता है ताकि राजस्व प्राप्ति हो और साथ ही आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिले.
इनडायरेक्ट टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो वस्तुओं और सेवाओं की खपत पर लगाया जाता है. इसका मतलब है कि उपभोक्ता (Consumer) ही असल में इस टैक्स का भुगतान करते हैं, हालांकि उत्पाद के निर्माता या विक्रेता द्वारा इसे इकट्ठा किया जाता है और सरकार को जमा किया जाता है.
आइए इसे एक उदाहरण से समझें:
मान लीजिए आपने एक शर्ट खरीदा है जिसकी कीमत 100 रुपये है और उस पर 10% का जीएसटी (इनडायरेक्ट टैक्स) लगा हुआ है. इसका मतलब है कि शर्ट की असली कीमत 100 रुपये नहीं बल्कि 110 रुपये है (100 + 10% जीएसटी). आप 110 रुपये का भुगतान करते हैं, जिसमें से 10 रुपये जीएसटी के रूप में सरकार को जाते हैं. इस प्रकार, आप इनडायरेक्ट रूप से सरकार को टैक्स का भुगतान कर रहे हैं.
इनडायरेक्ट टैक्सेस की दरें अक्सर बदलती रहती हैं. भारत में, जीएसटी को लागू करने से पहले, विभिन्न प्रकार के इनडायरेक्ट टैक्स थे, जिससे टैक्स प्रणाली जटिल थी. इनडायरेक्ट टैक्सेस का प्रभाव वस्तुओं के प्रकार और टैक्स की दरों पर निर्भर करता है.