5 चालान कटे तो जा सकता है ड्राइविंग लाइसेंस, किराए पर ऑटो ई रिक्शा चलवाने वालों की भी बढ़ेगी मुश्किल

ट्रैफिक नियमों को बार-बार तोड़ने वाले वाहन चालकों के लिए अब मुश्किल बढ़ सकती है.

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Reepu Kumari

सड़क पर वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेना अब भारी पड़ सकता है. बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है. उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में ऐसे वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई का फैसला लिया गया है, जिनके नाम पर लगातार चालान दर्ज हो रहे हैं. इस कदम का मकसद सड़क हादसों और यातायात नियमों के उल्लंघन पर लगाम लगाना है.

पांच चालान होने पर लाइसेंस पर गिरेगी गाज

प्रशासन ने बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को लेकर सख्ती दिखाई है. बैठक में निर्देश दिया गया कि किसी वाहन के नाम पर पांच या उससे ज्यादा चालान दर्ज होने पर ड्राइविंग लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए. ऐसे वाहन चालकों को अब यातायात नियमों की अनदेखी करने से पहले सावधान रहना होगा.

किराए पर ऑटो-ई-रिक्शा चलवाने वालों पर भी नजर

आगरा में ऑटो और ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के कारण कई इलाकों में जाम की समस्या बनी रहती है. इसे नियंत्रित करने के लिए डीआईजी रेंज शैलेश कुमार पांडेय ने ऐसे वाहन मालिकों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जो कई वाहन खरीदकर उन्हें किराए पर चलवाते हैं. केवल वैध लाइसेंस वाले चालकों को ही वाहन चलाने की अनुमति होगी. नियमों का उल्लंघन करने वाले मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.


शहर में लागू हो सकती है जोन प्रणाली

ऑटो और ई-रिक्शा की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए शहर में जोन प्रणाली लागू करने की योजना बनाई जा रही है. इसके तहत वाहनों के संचालन को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने पर विचार है. प्रशासन का मानना है कि इससे सड़कों पर अनियंत्रित यातायात को संभालने और जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है.

कोहरे में एक्सप्रेस-वे पर घटेगी रफ्तार

बैठक में पेश पुलिस और परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, हेलमेट न पहनने, वाहन चलाते समय मोबाइल इस्तेमाल करने और नशे में ड्राइविंग के मामलों में कुछ कमी आई है. हालांकि, सीटबेल्ट नहीं लगाने और गलत दिशा में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ी हैं. सर्दियों को देखते हुए यमुना और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर गति सीमा घटाने, संकेतक लगाने, पेड़ों की छंटाई और एंबुलेंस व क्रेन की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समितियों की नियमित बैठक और स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच पर भी जोर दिया गया है.