1 लाख रुपये सैलरी होने के बाद भी महीने के आखिर में जेब खाली? पैसे बचाने के लिए अपनाएं ये आसान कदम
1 लाख रुपये या उससे ज्यादा कमाने के बावजूद अगर महीने के अंत में पैसे नहीं बचते, तो समस्या कमाई नहीं बल्कि खर्च संभालने की हो सकती है. EMI, गैर-जरूरी भुगतान, बचत और आपातकालीन फंड की जांच से स्थिति सुधारी जा सकती है.
अच्छी सैलरी मिलने के बाद भी कई लोगों को महीने के आखिरी दिनों में बजट बिगड़ा हुआ नजर आता है. इसका कारण अक्सर छोटे-छोटे खर्च, कई EMI और बचत को टालते रहना होता है. ऐसे में हर तीन महीने में सिर्फ 20 मिनट का वित्तीय ऑडिट आपको अपनी कमाई और खर्च के बीच संतुलन समझने में मदद कर सकता है.
1. सभी EMI का हिसाब लगाएं
सबसे पहले पिछले तीन महीनों के बैंक स्टेटमेंट निकालें और हर EMI को एक जगह लिखें. इसमें होम या कार लोन के साथ छोटी खरीदारी की नो-कॉस्ट EMI भी शामिल करें, क्योंकि अलग-अलग छोटी किस्तें मिलकर बड़ा बोझ बन सकती हैं. एक सामान्य वित्तीय बेंचमार्क के तौर पर कुल EMI को इन-हैंड सैलरी के 40 प्रतिशत से नीचे रखना बेहतर माना जाता है.
वहीं, अकेले होम लोन की किस्त 30 प्रतिशत से अधिक न हो, तो बजट पर दबाव कम रहता है. इसके बाद OTT, ऐप रिन्यूअल, फूड डिलीवरी शुल्क और जिम जैसी नियमित कटौतियों को भी देखें. ये रकम छोटी लग सकती है, लेकिन हर महीने कई हजार रुपये तक खर्च बढ़ा सकती है.
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2. सैलरी आते ही बचत पहले करें
महीना खत्म होने के बाद बची रकम को निवेश करने की रणनीति अक्सर काम नहीं करती. बेहतर तरीका यह है कि सैलरी खाते में आते ही बचत और निवेश की रकम अलग कर दी जाए. इसके लिए महीने की 1 या 2 तारीख को SIP का ऑटो-डेबिट लगाया जा सकता है.
इससे खर्च के लिए उपलब्ध पैसा पहले ही तय हो जाता है और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रहता है. साथ ही, निवेश शुरू करने से पहले करीब छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है. इसे ऐसे साधन में रखा जा सकता है, जहां जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से उपलब्ध हो.
3. अपनी असली बचत दर जानें
सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि महीने में कितने रुपये बच रहे हैं. अपनी बचत दर निकालना ज्यादा उपयोगी है. इसके लिए कुल मासिक बचत को इन-हैंड सैलरी से भाग देकर प्रतिशत निकालें. अगर बचत 10 प्रतिशत से भी कम है, तो यह खर्चों की समीक्षा करने का संकेत है.
10 से 20 प्रतिशत बचत सामान्य स्तर मानी जा सकती है, जबकि 25 प्रतिशत से ज्यादा बचत लंबे समय में संपत्ति बनाने की बेहतर क्षमता दिखाती है. 1 लाख रुपये की इन-हैंड सैलरी पर 20 प्रतिशत बचत का मतलब हर महीने 20,000 अलग रखना होगा. अपनी वास्तविक स्थिति देखकर लक्ष्य तय करना ज्यादा व्यावहारिक है.
4: हर तीन महीने में करें मनी ऑडिट
पैसे बचाने की आदत एक बार का फैसला नहीं है. हर तीन महीने में लगभग 20 मिनट निकालकर EMI, सब्सक्रिप्शन, बचत, निवेश और जरूरी खर्चों की दोबारा समीक्षा करें. अगर EMI 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच रही है, तो नए कर्ज से बचना समझदारी होगी.
इसी तरह, गैर-जरूरी सब्सक्रिप्शन बंद करने से बची रकम को निवेश या इमरजेंसी फंड में भेजा जा सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि सैलरी बढ़ने के साथ खर्च भी उसी अनुपात में न बढ़े. पहले बचत की रकम तय करें, फिर बाकी पैसे से खर्च का बजट बनाएं. यही अनुशासन धीरे-धीरे वित्तीय सुरक्षा मजबूत कर सकता है.