Mark Zuckerberg post-apocalyptic bunker: मेटा के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं, हालांकि इस बार कोई विवाद नहीं है बल्कि उनकी ओर से हवाई में बनाया जा रहा एक स्ट्रक्चर है, जिसको लेकर लगातार रिपोर्ट आ रही है कि वो एक 'पोस्ट-एपोकैलिप्टिक बंकर' बनवा रहे हैं, मतलब कि अगर दुनिया खत्म होने जैसे हालात बन जाएं या प्रलय आ रही हो तो उससे बचने के लिए एक ऐसा घर बना रहे हैं जिसमें ऐसी विकट परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहा जा सकता है.
इस खबर ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन, इसे सीधे-सीधे "पोस्ट-एपोकैलिप्टिक" कहना शायद सही न हो, क्योंकि इसका असल मकसद साफ नहीं है. आइए इस निर्माण को लेकर सारी चीजों को समझते हैं कि इसे क्यों बनाया जा रहा है और इसकी कीमत समेत इसमें क्या खासियत हैं.
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मार्क जुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चैन अपने कुआऊ रैंच नामक 1,400 एकड़ के विशाल प्रॉपर्टी पर एक अंडरग्राउड शेल्टर का निर्माण कर रहे हैं. यह शेल्टर 5,000 वर्ग फुट बड़ा होगा और इसमें खुद की बिजली और भोजन उत्पादन करने की व्यवस्था भी होगी. हालांकि, इसे पूरी तरह से "बंकर" कहना भी ठीक नहीं है, क्योंकि इसमें ऊपर की तरफ भी कई बिल्डिंग और सुविधाएं होंगी.
इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 270 मिलियन डॉलर से अधिक बताई जा रही है, जिसमें जमीन की खरीद और निर्माण दोनों शामिल हैं. भारतीय रुपयों में बात करें तो इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल 22.48 हजार करोड़ रुपए खर्च होने वाले हैं.
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इस परियोजना के बारे में अभी तक सारी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक शेल्टर में ये सुविधाएं हो सकती हैं:
स्वतंत्र रूप से संचालित बिजली प्रणाली (सोलर पैनल आदि)
कृषि क्षेत्र, ताकि भोजन का खुद उत्पादन हो सके
पानी का संग्रहण और उसे रिफाइन करने की मशीनरी
सुरक्षा के अल्ट्रा मॉर्डन सिस्टम
इस शेल्टर के निर्माण का मकसद अभी साफ नहीं है और जुकरबर्ग ने भी इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. कुछ का मानना है कि यह किसी आपदा या संकट की स्थिति में सुरक्षित रहने के लिए बनाया जा रहा है, जबकि कुछ इसे उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा बढ़ाने का तरीका मानते हैं.
इस प्रोजेक्ट को लेकर कई तरह के विवाद भी उठ रहे हैं. कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जुकरबर्ग का हवाई में इतना बड़ा निवेश स्थानीय समुदायों के लिए मुसीबत बन सकता है और जमीन के दाम बढ़ा सकता है. इसके अलावा, इस तरह के शेल्टरों का निर्माण एक असमानता का प्रतीक भी हो सकता है, जहां अमीर लोग खुद को बचाने के लिए खास व्यवस्था कर लेते हैं, जबकि बाकी लोग ऐसे ही रह जाते हैं.
शेल्टर के अंदरूनी डिजाइन या इस्तेमाल होने वाली तकनीकों के बारे में अभी तक ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए सवालिया निशान भी लगे रहते हैं. कुछ आशंकाएं जताई जा रही हैं कि क्या ऐसे शेल्टर वास्तव में काम कर पाएंगे, अगर पृथ्वी पर कोई बड़ा संकट हुआ तो क्या जुकरबर्ग का अमीर होना कोई मायने रखेगा, और क्या ये समाज के लिए एक अच्छा उदाहरण है. तो कुल मिलाकर, मार्क जुकरबर्ग हवाई में जो बना रहे हैं, उसे सीधे-सीधे "पोस्ट-एपोकैलिप्टिक बंकर" कहना सही नहीं है. लेकिन यह निश्चित रूप से एक असाधारण और खर्चीला प्रोजेक्ट है, जिसके बारे में सवाल उठना लाजिमी है. हमें इंतजार करना होगा कि भविष्य में इस बारे में और क्या जानकारी सामने आती है.