स्मार्टफोन आयताकार होते हैं चौकोर क्यों नहीं? जानिए 4 बड़े कारण जिससे अबतक कई यूजर्स अनजान
स्मार्टफोन लगभग हमेशा आयताकार ही क्यों होते हैं, चौकोर या किसी अन्य आकार में नहीं? इसका मुख्य कारण हाथ में पकड़ने की सुविधा, जेब में फिट होना, वीडियो-मीडिया देखने का बेहतर अनुभव और गिरने पर मजबूती है.
नई दिल्ली: आज के दौर में हर स्मार्टफोन एक जैसा दिखता है. लंबा, पतला और आयताकार. कभी-कभी मन में सवाल उठता है कि इसे चौकोर क्यों नहीं बनाया जाता? क्या सिर्फ फैशन है या कोई ठोस वजह? रेडिट, क्वोरा और टेक एक्सपर्ट्स की बातों से साफ है कि यह डिजाइन यूजर्स की आदतों, टेक्नोलॉजी की जरूरतों और प्रैक्टिकल फायदों पर आधारित है. आयताकार फोन हाथ में आरामदायक लगता है, वीडियो देखने में मजा आता है और रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से फिट हो जाता है. आइए चार मुख्य कारणों को विस्तार से समझते हैं.
हाथ में पकड़ने और जेब में रखने की आसानी
हमारी हथेलियां प्राकृतिक रूप से लंबी और आयताकार होती हैं. इसलिए आयताकार फोन हाथ में अच्छी ग्रिप देता है—एक हाथ से आसानी से इस्तेमाल हो जाता है. चौकोर फोन पकड़ने में अजीब लगेगा और फिसल सकता है. साथ ही, जेब ज्यादातर गहरी लेकिन संकरी होती है. लंबा फोन सीधा फिट हो जाता है, जबकि चौकोर फोन जेब में उभरा हुआ या मुश्किल से अंदर जाएगा. फोल्डेबल फोन में भी जब चौकोर-आयताकार मिक्स होता है, तो दोनों हाथों की जरूरत पड़ती है.
वीडियो और मीडिया का शानदार अनुभव
ज्यादातर फिल्में, यूट्यूब वीडियो और गेम्स 16:9 या 20:9 जैसे वाइड रेशियो में बनाए जाते हैं. आयताकार स्क्रीन पर ये पूरी तरह फिट हो जाते हैं, बिना ब्लैक बार के. चौकोर स्क्रीन में वीडियो देखते समय ऊपर-नीचे काली पट्टियां आ जाएंगी, जो अनुभव खराब कर देंगी. टीवी, सिनेमाघर का पर्दा और लैपटॉप सब आयताकार इसलिए हैं क्योंकि मीडिया इसी शेप में सबसे अच्छा लगता है. फोन को भी उसी हिसाब से डिजाइन किया जाता है.
गिरने पर ज्यादा मजबूती और सुरक्षा
आयताकार फोन के कोनों को गोल बनाया जा सकता है, जिससे गिरने पर असर कम होता है और स्क्रीन टूटने की संभावना घट जाती है. चौकोर डिजाइन में कोने तीखे होते हैं, जो इंपैक्ट पर ज्यादा जोर झेलते हैं और आसानी से टूट सकते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आयताकार शेप डिवाइस को बेहतर ड्यूरेबिलिटी देता है. फ्लैट साइड वाले फोन में स्ट्रेस बराबर बंटता है, जबकि कर्व्ड या चौकोर में फोकस पॉइंट्स ज्यादा बनते हैं.
बैटरी, कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग की सुविधा
आजकल की लिथियम-आयन बैटरी आयताकार होती हैं और फोन के अंदर ज्यादा जगह घेरती हैं. चौकोर फोन में बैटरी फिट करने के लिए जगह कम पड़ सकती है या वेस्ट हो सकती है. साथ ही, स्क्रीन, सर्किट और सॉफ्टवेयर सब आयताकार ग्रिड पर आसानी से काम करते हैं. चौकोर या अन्य शेप में प्रोडक्शन महंगा और जटिल हो जाता है. इसलिए कंपनियां स्टैंडर्ड आयताकार डिजाइन पर टिकी रहती हैं.
क्या कभी बदलाव आएगा?
फिलहाल तो नहीं लगता, लेकिन फोल्डेबल और रोलेबल फोन जैसे प्रयोग हो रहे हैं. फिर भी, बेसिक शेप आयताकार ही रहती है. यूजर्स की आदत, मीडिया की जरूरत और प्रैक्टिकल फायदे इसे बनाए रखते हैं. अगली बार फोन देखें तो समझ आएगा कि यह डिजाइन सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि सोच-समझकर चुना गया है.