आपके स्मार्टफोन-लैपटॉप पर भी लिखा है CE? 99% लोगों को नहीं पता होगा मतलब

आजकल हर स्मार्टफोन, लैपटॉप, चार्जर, हेडफोन या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर CE लिखा दिख जाता है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ये निशान मतलब प्रोडक्ट यूरोप में बना है… जबकि ऐसा नहीं है, चलिए जानते हैं क्या है इसका मतलब…

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: आजकल हर स्मार्टफोन, लैपटॉप, चार्जर, हेडफोन या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर CE लिखा दिख जाता है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ये निशान मतलब प्रोडक्ट यूरोप में बना है, लेकिन ये बिल्कुल गलत धारणा है.
CE मार्क असल में प्रोडक्ट की सुरक्षा से जुड़ा मार्क है. इसका पूरा नाम Conformité Européenne है, जो फ्रेंच भाषा का शब्द है. आसान हिंदी में इसका मतलब है- “यूरोपीय नियमों के अनुसार”.

जब किसी कंपनी पर CE मार्क लगाती है तो वो ये गारंटी देती है कि उनका प्रोडक्ट यूरोपीय संघ के बनाए नियमों और स्टैंडर्ड को पूरा करता है. यानी प्रोडक्ट में इलेक्ट्रिक शॉक, आग लगने, हानिकारक रेडिएशन या बच्चों की सुरक्षा जैखिम नहीं होना चाहिए. इसे यूरोप में बेचने के लिए जरूरी माना जाता है.

CE मार्क का मतलब क्या नहीं है?

CE मार्क कैसे मिलता है?

कंपनी को सबसे पहले खुद चेक करना पड़ता है कि प्रोडक्ट यूरोपीय नियमों को फॉलो कर रहा है या नहीं. इसे सेल्फ अस्सेमेंट कहते हैं. जो प्रोडक्ट कम खतरनाक होते हैं (जैसे मोबाइल चार्जर, पावर बैंक), उनकी जांच कंपनी खुद कर सकती है. लेकिन मेडिकल डिवाइस, बड़े मशीनें या ज्यादा रिस्क वाले प्रोडक्ट्स की जांच किसी सरकारी मंजूरी वाली थर्ड-पार्टी लैब से करानी पड़ती है. ऐसी स्थिति में CE मार्क के पास 4 अंकों का नंबर भी लिखा होता है.

नोट: CE मार्क देखकर आप ये समझ सकते हैं कि कंपनी ने कम से कम बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन किया है. हालांकि, ये 100% गारंटी नहीं है, लेकिन अच्छा संकेत जरूर है.