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किन Apps के इस्तेमाल से पाकिस्तानियों ने हैक किया ब्रह्मोस मिसाइल के इंजीनियर का लैपटॉप? 

Malware Apps: 2018 में ब्रह्मोस के पूर्व वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया था. पाकिस्तान की एक एजेंट ने दोस्त बनने के बहाने इनके लैपटॉप पर तीन ऐप्स डाउनलोड कराई और फिर इनके लैपटॉप से सारे सीक्रेट चुरा लिए. क्या है या पूरा मामला, चलिए जानते हैं. 

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Malware Apps
Courtesy: Canva

Malware Apps: ब्रह्मोस के पूर्व वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल को सेशन कोर्ट ने अजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इन पर आरोप है कि इन्होंने मिलिट्री सीक्रेट्स को पाकिस्तान के साथ लीक किया है. बता दें कि निशांत नागपुर में मिसाइल असेंबली यूनिट में काम करते थे. इन्हें अवॉर्ड से भी नवाजा गया था. इन पर क्रिमिनल कोड प्रोसीजर की धारा 235 के तहत दोषी ठहराया गया है. इसके साथ ही इन्हें आईटी अधिनियम की धारा 66 (एफ) और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की अलग-अलग धाराओं के खिलाफ भी दोषी पाया गया है जिसमें हथियारों के बारे में जरूरी जानकारी दूसरे देशों के साथ लीक करना शामिल है. 

यूपी-एटीएस जांच अधिकारी पंकज अवस्थी ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि सेजल नाम की एक लड़की ने पाकिस्तान से फेसबुक अकाउंट बनाया था. इस अकाउंट का इस्तेमाल कर वो पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स और इंडियन टारगेट्स (जिन्हें वो टारगेट बनाना चाहती थी) के साथ बात करती थी. सेजल एक ऐसे ग्रुप का हिस्सा थी जिसमें भारतीय रक्षा कर्मचारियों का डाटा चुराने का काम किया जाता था. 

तीन ऐप्स ने चुराया डाटा: 

अवस्थी ने अदालत को बताया कि सेजल ने निशांत को एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने के लिए कहा. बता दें कि 2017 में उन्होंने अपने निजी लैपटॉप पर तीन ऐप इंस्टॉल किए. ये ऐप Qwhisper, Chat to Hire और X-trust थे. इन्हीं की मदद से सेजल ने निशांत के लैपटॉप से सभी गोपनीय जानकारी चुराई थी. 

मामले की जांच से पता चला कि ब्रह्मोस मिसाइल से संबंधित जरूरी दस्तावेज उसके निजी कंप्यूटर पर पाए गए, जो BAPL के सिक्योरिटी मेजर्स का उल्लंघन था. निशांत ने लिंक्ड-इन पर सेजल के साथ चैट भी की, जहां उसने यूके के हेस एविएशन में रिक्रूटर के तौर पर काम करने में रुचि दिखाई थी. 

कैसे गिरफ्तार हुए निशांत: 

मिसाइल इंजीनियर निशांत को अक्टूबर 2018 में मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के एंटी-टेरेरिज्म स्क्वाड (ATS) ने गिरफ्तार किया था. वह BAPL के टेक्निकल रिचर्ज सेक्शन में कार्यरत थे. यह एक इंडो-रशियन का ज्वाइंट वेंचर था जो BrahMos मिसाइल बनाता था.