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बच्चों को लग गई गेम की लत? पड़ता है जिंदगी पर असर, ऐसे छुड़ाएं आदत

आज वर्ल्ड हेल्थ डे है. मेंटल हेल्थ कितनी आज के समय में कितनी जरूरी, ये शायद हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है. खासतौर पर बच्चों के लिए… इसके अलग ही मायने हैं.

Shilpa Shrivastava
बच्चों को लग गई गेम की लत? पड़ता है जिंदगी पर असर, ऐसे छुड़ाएं आदत
Courtesy: ChatGPT AI

नई दिल्ली: आज वर्ल्ड हेल्थ डे है. मेंटल हेल्थ कितनी आज के समय में कितनी जरूरी, ये शायद हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है. खासतौर पर बच्चों के लिए… इसके अलग ही मायने हैं. आजकल के बच्चे इसे एक बड़ा इश्यू मानते हैं और इस पर ध्यान भी देते हैं. जो बच्चे ज्यादा फोन देखते हैं या फिर ऑनलाइन गेमिंग करते हैं, उनके लिए खासतौर से मेंटल हेल्थ काफी जरूरी होती है. 

कई बच्चे घंटों मोबाइल पर गेम खेलते हैं और धीरे-धीरे पढ़ाई, खेलकूद और परिवार से दूरी बनाने लगते हैं. परेशानी तब बढ़ती है, जब गेम खेलने की आदत बच्चे के व्यवहार, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते इसके संकेत पहचानना और सही कदम उठाना जरूरी है.

घंटों गेम खेलने से असल जिंदगी पर पड़ता है असर!

कुछ रिसर्च के अनुसार, ऑनलाइन गेम खेलना गलत नहीं है, लेकिन समस्या तब होती है, जब बच्चा गेम को अपनी नॉर्मल लाइफ बनाने पर ज्यादा जोर देने लगता है. ऐसा होने पर बच्चे पढ़ाई में ध्यान लगाना छोड़कर दोस्तों-परिवारों से दूरी बनाने लगते हैं. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में परेशानी, गर्दन और पीठ में दर्द तथा शरीर की एक्टिविटी कम होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

बच्चों में गेमिंग की लत के क्या संकेत हैं?

  • अगर बच्चे का गेम जबरदस्ती बंद कर देते हैं तो बच्चा गुस्सा हो जाता है या फिर वो चिड़चिड़ाने लगता है. 

  • पढ़ाई और दूसरी एक्टिविटीज में कम रुचि लेता है.

  • नींद पूरी नहीं होती है और देर तक मोबाइल चलाता रहता है. 

  • परिवार और दोस्तों से दूरी बनाने लगता है. 

  • गेम खेलने के लिए बार-बार झूठ बोलता है और समय गलत बताता है.

  • गेम के कारण रोजमर्रा की जिम्मेदारियां पूरी न कर पाना.

माता-पिता बच्चों को गेमिंग की लत से कैसे बचाएं?

  • बच्चों को डांटने के बजाय यह समझें कि बच्चे को गेम खेलने में इतना मजा क्यों आता है. क्योंकि अगर आप बच्चे से अचानक फोन छीनते हैं तो विवाद बढ़ सकता है. 

  • बच्चे का स्क्रीन टाइम लिमिट करें. इससे धीरे-धीरे बच्चे की फोन देखने की आदत कम हो जाती है. बच्चे का सोने, पढ़ने, खेलने, फोन देखने का समय निश्चित करना जरूरी है. 

  • बच्चों को क्रिकेट, फुटबॉल, साइलिंग या अन्य एक्टिविटीज खेलकूद में शामिल करें. इससे बच्चों के पास फोन के अलावा विकल्प होंगे. 

  • बच्चों के साथ बातचीत करें, उन्हें बाहर घुमाने ले जाएं और उनकी रुचियों को समझें. 

  • अगर माता-पिता हर समय मोबाइल में बिजी रहेंगे तो बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना मुश्किल हो जाएगा. घर में सभी के लिए स्क्रीन से दूर रहने का समय तय करें.