जिस तरह से सरकार ने उन सभी वाहनों के लिए स्क्रैपिंग पॉलिसी जारी की थी जो 10 साल पुराने हैं. ठीक उसी तरह, मोबाइल फोन स्क्रैपिंग पॉलिसी को भी लागू किया जा रहा है. इस पॉलिसी के तहत अगर कोई यूजर 5 साल पुराना फोन अभी तक इस्तेमाल कर रहा है तो उन पर रोक लगाई जाएगी. इसमें आपके 5 साल पुराने फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाएगी. अगर आप भी इस तरह की खबरों पर यकीन कर रहे हैं तो ठहर जाइए. इस पूरे मामले की सच्चाई हम आपको यहां बता रहे हैं.
क्या है पोस्ट की सच्चाई?
सोशल मीडिया पर यह खबर काफी वायरल हो रही है कि स्पेशिफिक एब्जॉर्ब्प्शन रेट यानी SAR वैल्यू के चलते 5 साल पुराने फोन को स्क्रैप किया जाएगा. यह वायरल पोस्ट ज्यादातर इंस्टाग्राम पर देखी जा सकती है. लेकिन हम आपको बता दें कि ऐसा कुछ नहीं है. सरकार ने ऐसा कोई दावा नहीं किया है और न ही फोन्स के लिए स्क्रैपिंग पॉलिसी लाई जा रही है.
बता दें कि हर स्मार्टफोन निर्माता कंपनी सरकार द्वारा तय की गई SAR वैल्यू के स्टैंडर्ड को अपनाती है. इसकी डिटेल्स फोन के रिटेल बॉक्स पर भी लिखी होती हैं. अगर आपके पास भी ऐसी किसी खबर की जानकारी है तो उसे नजरअंदाज करें. आप जब तक चाहें अपने फोन को इस्तेमाल कर सकते हैं.
कितनी होनी चाहिए SAR वैल्यू:
हर डिवाइस के लिए SAR वैल्यू तय की गई है. किसी भी डिवाइस की SAR वैल्यू 1.6 W/Kg से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यह भी बता दें कि यह नियम नया नहीं है. इसे 1 सितंबर 2013 को पेस किया गया था. बता दें कि SAR वैल्यू (स्पेसिपिक एबजॉर्पशन रेट) बताता है कि आपके फोन से आपकी बड़ी कितनी रेडियो फ्रीक्वेंसी एक्सपोजर को एब्जॉर्ब करती है. SAR वैल्यू आपके फोन से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी को चेक करता है.
अपने फोन की SAR वैल्यू चेक करें:
वैसे तो यह आपको अपने फोन के रिटेल बॉक्स पर मिल जाएगी. आप इसे *#07# डॉयल कर भी चेक कर सकते हैं.