Explainer: क्या बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट बंद करना सही है, या इसके रिस्क भी हैं?
क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करना सही है, या फिर इसके बाद रिस्क और भी ज्यादा बढ़ जाएगा...? क्या इस बारे में आपने सोचा है? अगर नहीं, तो चलिए जानते हैं कि क्या सही रहेगा...
नई दिल्ली: आज के समय में बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल करना एक चर्चा का विषय बन गया है. बच्चे आज धड़ल्ले से इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. नए दोस्तों से जुड़ना, नई-नई चीजें सीखना, एंटरटेनमेंट का मजा लेना जैसे कई काम यहां से करना आम बात है. जितनी तेजी से सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से माता-पिता की चिंता भी बढ़ रही है.
बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल करने को लेकर कई खबरें चल रही हैं. एक खबर आई थी, जिसमें कहा गया था कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया को लेकर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं. हालांकि, बाद में सरकारी सूत्रों ने इन्हें गलत बता दिया था. वहीं, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े भारतीय कानूनों का पालन करना कानूनी रूप से जरूरी बनाया जा सकता है या नहीं. कोर्ट ने इस मुद्दे पर कानून के तहत जरूरी कदम उठाने की संभावना पर भी ध्यान दिया.
बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बंद करना सही या गलत?
इन सब के बीच एक सवाल यह उठता है कि क्या बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट को बंद कर देना सही रहेगा, या फिर इससे रिस्क बढ़ने की उम्मीद बढ़ जाएगी. तो चलिए जानते हैं कि अगर बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट को बंद कर दिया जाए तो इसके फायदे क्या हैं और इसके रिस्क क्या हो सकते हैं, ये भी जानते हैं.
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अकाउंट बंद करने के फायदे:
अगर बच्चा सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा समय बिता रहा है, तो अकाउंट बंद करना सही रहेगा, क्योंकि इससे स्क्रीन टाइम कम किया जा सकता है. इससे बच्चे की पढ़ाई, नींद, खेल और परिवार के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है.
सिर्फ यही नहीं, सोशल मीडिया पर साइबरबुलिंग, अनजान लोगों से संपर्क, अनुचित कंटेंट और ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़े खतरों से भी सुरक्षा मिल सकती है. देखा जाए तो छोटे बच्चों को इन खतरों की पूरी समझ नहीं होती. ऐसे में अकाउंट बंद करना कुछ परिस्थितियों में उन्हें ऑनलाइन जोखिमों से दूर रखने का एक तरीका हो सकता है.
सोशल मीडिया को पूरी तरह बंद करना भी समाधान नहीं:
तरीका सही है लेकिन यह परमानेंट सॉल्यूशन नहीं है. अगर बच्चा अपने दोस्तों या क्लासमेट्स से ऑनलाइन कनेक्टेड है, तो अकाउंट बंद कर देना उसे दूसरों से अलग महसूस करा सकता है. इसके अलावा, अगर माता-पिता बिना बातचीत किए सोशल मीडिया बंद कर देते हैं, तो बच्चे में नाराजगी के लक्षण भी दिख सकते हैं.
कुछ बच्चे माता-पिता से छिपकर दूसरा अकाउंट बनाने या किसी दूसरे डिवाइस से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की कोशिश भी कर सकते हैं. इस तरह की स्थिति में आपको बच्चे की ऑनलाइन एक एक्टिविटी के बारे में जानकारी नहीं मिल पाएगी.
बेहतर तरीका क्या हो सकता है?
हर बच्चे के लिए एक जैसा नियम हो, यह जरूरी नहीं. बच्चे की उम्र, समझ और जरूरत को देखते हुए उसके साथ बैठकर फैसला लें. हालांकि, हमें यह भी लगता है कि बच्चे का अकाउंट पूरी तरह से बंद करने के बजाय स्क्रीन टाइम लिमिट को तय करना चाहिए. साथ ही प्राइवेसी समझाना और बच्चे से ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में बात करना भी मददगार साबित हो सकता है.
इसके अलावा माता-पिता को बच्चे को यह भी समझाना चाहिए कि किसी अनजान व्यक्ति को निजी जानकारी, फोटो या पासवर्ड शेयर नहीं करना चाहिए. सबसे जरूरी बात यह है कि सोशल मीडिया को लेकर बच्चों के साथ डर या सजा की बजाय बातचीत और भरोसे का माहौल बनाया जाए. अगर बच्चा किसी ऑनलाइन परेशानी का सामना करता है, तो उसे पता होना चाहिए कि वह बिना डर के अपने माता-पिता से बात कर सकता है.