UPI ने बदली पैसे की दुनिया, DigiLocker ने खत्म की कागजों की टेंशन! जानिए डिजिटल इंडिया का सफर

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भारत के इसी डिजिटल बदलाव के सफर को समझना महत्वपूर्ण है. इस बदलाव में सरकार के साथ बैंक, नियामक संस्थाएं और तकनीकी संस्थानों की भी भूमिका रही है.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: एक समय था जब बैंक में पैसे जमा करने, सरकारी कागज बनवाने या किसी सेवा के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ता था. आज मोबाइल फोन से कई काम कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं. दुकान पर QR कोड से पेमेंट हो या मोबाइल में जरूरी डॉक्यूमेंट रखना, डिजिटल सेवाओं ने आम लोगों की जिंदगी को काफी हद तक आसान बनाया है.

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भारत के इसी डिजिटल बदलाव के सफर को समझना महत्वपूर्ण है. इस बदलाव में सरकार के साथ बैंक, नियामक संस्थाएं और तकनीकी संस्थानों की भी भूमिका रही है.

UPI पेमेंट ने बदला पैसे भेजने का तरीका:

UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस भारत में डिजिटल पेमेंट का एक बड़ा जरिया बन चुका है. इसका पायलट लॉन्च 11 अप्रैल 2016 को हुआ था. NPCI द्वारा विकसित UPI की मदद से बैंक खातों के बीच तुरंत पैसे भेजना संभव हुआ. आज मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के जरिए चंद सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार और ऑनलाइन शॉपिंग तक इसका इस्तेमाल आम हो गया है.


DigiLocker से कागजों की जरूरत हुई कम:

DigiLocker ने जरूरी डॉक्यूमेंट्स को डिजिटल रूप में रखने की सुविधा दी. ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और वाहन से जुड़े डॉक्यूमेंट जैसे कई रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सकते हैं. इससे लोगों को हर जगह डॉक्यूमेंट्स की कागजी कॉपी लेकर चलने की जरूरत कम हुई है.

Jan Dhan Yojana से बैंकिंग तक पहुंच:

प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरुआत 2014 में हुई. इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, जो पहले औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से दूर थे. बैंक अकाउंट सरकारी योजनाओं के लाभ और दूसरी फाइनेंशियल सॉर्विसेज तक पहुंच का अहम जरिया बने. 

UMANG और Digital India Services:

2017 में शुरू हुआ UMANG ऐप कई सरकारी सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा. इससे लोगों को मोबाइल के जरिए अलग-अलग सरकारी सेवाओं तक पहुंच मिली. वहीं, 2015 में शुरू Digital India कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं को बढ़ावा देना रहा.

डिजिटल स्वास्थ्य और DBT का विस्तार:

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ाने पर जोर दिया. ABHA के जरिए डिजिटल हेल्थ पहचान और सहमति के आधार पर स्वास्थ्य रिकॉर्ड साझा करने की व्यवस्था विकसित की गई. इसी तरह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुंचाने की व्यवस्था को बढ़ाया गया.

डिजिटल भारत की असली तस्वीर:

भारत का डिजिटल बदलाव किसी एक योजना का परिणाम नहीं है. इसमें नीतियों, तकनीक, सरकारी संस्थाओं, बैंकों और करोड़ों लोगों की भागीदारी रही है. आज डिजिटल इंडिया की तस्वीर सिर्फ सरकारी दफ्तरों में नहीं, बल्कि दुकानदार के QR कोड, छात्र के DigiLocker, किसान के बैंक खाते और आम नागरिक के मोबाइल फोन में भी दिखाई देती है.