AI भी करता है भेदभाव? पुरुष और महिला AI पर स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है, जिसमें रिसर्चर्स ने कहा है कि जब AI को इंसान जैसा चेहरा और पहचान दी जाती है, तो लोग उसके साथ भी जेंडर के आधार पर अलग व्यवहार कर सकते हैं.
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर कई चर्चा लगातार चलती रहती हैं. AI एक ऐसी तकनीक है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी की मदद करती है. लेकिन अब इसे लेकर एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है, जिसमें रिसर्चर्स ने कहा है कि जब AI को इंसान जैसा चेहरा और पहचान दी जाती है, तो लोग उसके साथ भी जेंडर के आधार पर अलग व्यवहार कर सकते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ लिमरिक के रिसर्चर्स ने इस संबंध में एक स्टडी की। इसमें 189 लोगों ने वर्चुअल रिएलिटी यानी वीआर ऑफिस में काम किया। इस दौरान उनके साथ दो एआई एजेंट्स ने काम किया। इनमें एक को पुरुष रूप में जोनाह (Jonah) और दूसरे को महिला रूप में जोहाना (Johanna) के तौर पर दिखाया गया. इसमें सबसे खास बात यह थी कि इन दोनों एजेंट्स के पीछे एक ही तकनीक थी। इन दोनों को एक जैसे काम दिए गए थे.
पुरुष AI को मिले ज्यादा पैसे:
स्टडी के अनुसार, प्रतिभागियों ने पुरुष रूप वाले AI एजेंट को महिला रूप वाले AI एजेंट की तुलना में 10.25 फीसदी ज्यादा पैसे दिए. इसका सीधा मतलब, दो तकनीक जो एक जैसा ही काम करती है, सिर्फ जेंडर के आधार पर इन्हें मिलने वाली पेमेंट में काफी अंतर देखा गया। महिला एआई की तुलना में पुरुष एआई को ज्यादा पैसे दिए गए।
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सिर्फ यही नहीं, रिसर्चर्स ने स्टडी में यह भी पाया कि लोगों को पुरुष एआई महिला एआई की तुलना में ज्यादा ह्यूमन जैसा लगा। इससे संकेत तो यही मिलता है कि AI को अगर इंसानी रूप दिया जाता है तो लोगों को जेंडर से जुड़े ख्याल आ सकते हैं और इसके आधार पर भेदभाव किया जा सकता है।
इंसान जैसा AI बना भरोसेमंद:
स्टडी में कई प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें AI के पुरुष या महिला होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता. कुछ लोगों ने तो ऐसे AI को ज्यादा पसंद किया, जो इंसान जैसा दिखाई ही न दे. इसके बावजूद प्रयोग के दौरान इंसान जैसे दिखने वाले AI पर लोगों ने ज्यादा भरोसा किया और उसे ज्यादा पेमेंट भी किया. टेक्स्ट चैटबॉट और डेस्क रोबोट के साथ किए गए प्रयोगों में भी कुछ इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला. लोगों ने इंसान जैसे AI को अपेक्षाकृत ज्यादा भरोसेमंद माना.
तेजी से बढ़ रहा AI एजेंट्स का इस्तेमाल:
यह रिसर्च ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनियों में AI एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में करीब 80 फीसदी कंपनियां AI एजेंट्स का इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में AI का चेहरा, आवाज और जेंडर पहचान लोगों के फैसलों को किस तरह प्रभावित करती है, यह महत्वपूर्ण सवाल बन गया है.
रिसर्चर्स का कहना है कि AI को निष्पक्ष मानना पर्याप्त नहीं है. अगर उसकी डिजाइन इंसानों के पुराने पूर्वाग्रहों को फिर से एक्टिव करती है, तो तकनीक अनजाने में उन्हीं असमानताओं को आगे बढ़ा सकती है. इसलिए AI एजेंट्स को डिजाइन करते समय केवल उनकी तकनीकी क्षमता ही नहीं, बल्कि उनकी पहचान, लुक और लोगों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा.