Vaccination After Age 50: आजकल लोग सोचते हैं कि बचपन में लगाए टीके जीवन भर सुरक्षा देते रहेंगे. लेकिन यह धारणा गलत है. डॉक्टरों के अनुसार बचपन के ज्यादातर टीकों का असर 35 साल की उम्र तक ही रहता है. उसके बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है. खासकर 50 साल पार करने के बाद टीके लगाना बहुत जरूरी हो जाता है.
एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ इम्यूनिटी घटती है. इस वजह से साधारण सर्दी-खांसी, फ्लू या निमोनिया भी खतरनाक बन सकता है. डायबिटीज के मरीजों, विदेश यात्रा करने वालों और हज यात्रियों को तो खास तौर पर सतर्क रहना चाहिए. बीते पांच महीनों में एम्स ऋषिकेश में 800 से ज्यादा लोगों ने ये जरूरी टीके लगवाए हैं. यहां सप्ताह भर यह सुविधा उपलब्ध रहती है.
50 साल के बाद शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो जाती है. हर 10 में से करीब 3 लोग गंभीर संक्रमण की वजह से अस्पताल पहुंच जाते हैं. निमोनिया, सांस की तकलीफ, तेज बुखार और लगातार खांसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. इनसे बचाव के लिए वयस्क टीकाकरण (एडल्ट वैक्सीनेशन) सबसे अच्छा उपाय है. ये टीके न सिर्फ बीमारी होने से रोकते हैं बल्कि अगर बीमारी हुई भी तो उसकी गंभीरता कम करते हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक 50+ उम्र के लोगों के लिए दो टीके सबसे ज्यादा जरूरी हैं:- न्यूमोकोकल वैक्सीन (निमोनिया वैक्सीन): फेफड़ों और सांस की नली के संक्रमण से बचाती है. यह बैक्टीरिया से होने वाले गंभीर निमोनिया को रोकने में बहुत कारगर है.
इन्फ्लूएंजा वैक्सीन (फ्लू वैक्सीन): हर साल मौसमी फ्लू से सुरक्षा देती है. सर्दियों में फ्लू का खतरा ज्यादा रहता है.
इनके अलावा कुछ अन्य जरूरी टीके भी हैं:- टेटनस: घाव या चोट लगने पर संक्रमण से बचाव
हेपेटाइटिस: लीवर से जुड़ी बीमारियों से सुरक्षा
वैरीसेला (चिकन पॉक्स): जिन्हें बचपन में चिकन पॉक्स नहीं हुआ हो, उन्हें यह जरूर लगवाना चाहिए.