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देहरादून कोर्ट का बड़ा फैसला! पीड़िता को मिलेंगे आरोपी से बरामद 150 ग्राम सोना और 5 लाख रुपये

देहरादून की अदालत ने तंत्र-मंत्र के नाम पर कथित ठगी की शिकार महिला को राहत देते हुए आरोपी से बरामद 150 ग्राम सोना और पांच लाख रुपये सशर्त सुपुर्द करने का आदेश पुलिस को दिया है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
देहरादून कोर्ट का बड़ा फैसला! पीड़िता को मिलेंगे आरोपी से बरामद 150 ग्राम सोना और 5 लाख रुपये
Courtesy: social media

देहरादून: विकासनगर क्षेत्र में सामने आए तंत्र-मंत्र के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पीड़िता ओशिन गुरुंग की अर्जी पर सुनवाई करते हुए आरोपी से बरामद सोना और नकदी उसे सौंपने की अनुमति दी है. अदालत ने यह राहत कुछ निर्धारित शर्तों के साथ दी है. इस फैसले को पीड़िता के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जबकि मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी.

पीड़िता की अर्जी पर अदालत ने दी राहत

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ओशिन गुरुंग ने अदालत में आवेदन देकर बरामद सोना और नकदी अपने सुपुर्द किए जाने की मांग की थी. उन्होंने दावा किया कि यह संपत्ति उनकी है और इसके समर्थन में शपथपत्र के साथ गहनों की खरीद से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए. पीड़िता की ओर से यह भी कहा गया कि लंबे समय तक थाने के मालखाने में रखे रहने से गहनों और नकदी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद उनकी मांग को उचित माना और राहत देने का फैसला सुनाया.

तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी का आरोप

शिकायत के अनुसार सेलाकुई निवासी ओशिन गुरुंग ने आरोप लगाया था कि महंत राहुल थापा ने तंत्र-मंत्र और धार्मिक अनुष्ठानों का भरोसा देकर उनसे बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण ले लिए. आरोपों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में आरोपी को गिरफ्तार किया. जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 150 ग्राम सोना और पांच लाख रुपये नकद बरामद किए. इसके बाद यह संपत्ति पुलिस अभिरक्षा में रखी गई थी और उसी को लेकर अदालत में सुपुर्दगी की मांग की गई.

अदालत ने तय कीं सख्त शर्तें

न्यायालय ने संपत्ति वापस देने के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं. आदेश के अनुसार पीड़िता को 25 लाख रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि का एक जमानती प्रस्तुत करना होगा. इसके अलावा उन्हें लिखित आश्वासन देना होगा कि मुकदमे के अंतिम निस्तारण तक बरामद 150 ग्राम सोने को न तो बेचा जाएगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाएगा. अदालत की अनुमति के बिना उसके स्वरूप में भी कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा.

पुलिस को सौंपा गया अनुपालन का दायित्व

अदालत ने थानाध्यक्ष सेलाकुई को निर्देश दिया है कि बरामद नकदी और सोने की विधिवत फोटोग्राफी कराई जाए तथा नियमानुसार पंचनामा तैयार किया जाए. इसके बाद संपत्ति पीड़िता को सुपुर्द की जाए. साथ ही पुलिस को इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी न्यायालय को देने का भी आदेश दिया गया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा. फिलहाल इस फैसले से पीड़िता को बड़ी राहत मिली है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी.